रोटी और भूख

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praveen divedi
ये कैसा अजीब मंजर है,
हर के हाथ खंजर है..
यहाँ पैदावार कम होती है,
सारी जमीन ही बंजर है।

पढ़ लिखकर क्या पाएगा,
पिता पुत्र को समझाता है..
पढ़े-लिखे सब बेरोजगार हैं,
फिर खेती से भी जाएगा।

तेरे बड़े भाई को पढ़ाया था,
उसने उम्मीदों को जगाया था..
अब तक वो बेरोजगार है,
खेती करने में लाचार है।

बात मेरी मान जा बेटा,
छोड़ ख्वाब ये पढ़ाई का..
आ मैं सिखा दूँ तुझको,
तरीका हल की जुताई का।

अगर सब शहर को जाएंगे,
तो अन्न कौन उपजाएगा..
शिक्षा से नहीं भूख है मिटती,
पेट को क्या समझाएगा।

माना शिक्षा से ज्ञान है मिलता,
और विकास भी आता है..
पर इससे भी ज्यादा जरुरी,
रोटी और भूख का नाता है।

भूख सदा अपराध को जनती,
शिक्षा भर से क्या होगा..
पढ़े-लिखेगा वो ही भाई,
जिसका पेट भरा होगा।

                                                                            #प्रवीण द्विवेदी

परिचय : प्रवीण द्विवेदी उ.प्र के बाँदा में रहते हैं और शौकिया लिखते हैं। आपने हिन्दी से एमए किया है,साथ ही बीएड भी शिक्षित हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।