मैं टमाटर हूँ

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mahesh gupta
मैं अपनी क्या औकात बताऊँ,
जेब को कर दी ढीली
मैं क्या अपनी पहचान बताऊँ,
छौंका लगाकर जला दिया
मेरे गोल-मटोल अंगों को,
एक ही झटके में रुला दियाl
मैं क्या अपनी पहचान बताऊँ,
लाल चुनर पहन कर बैठी
ठाठ जमाकर बाजार में,
है हिम्मत तो छूकर देखो
कर दूंगी मैं मुंह को लाल,
साज-संवार रहा है मुझको
सब्जीवाला दिन और रात,
दाल बराबर मैं हो गई
अब मत करना मुझे बर्बादl
मैं टमाटर हूँ,
मुझसे मत करना अकड़कर बात
हर सब्जी का देती साथ,
अब देखो सभी हैं मेरे बिना उदास
मैं टमाटर हूँ..ll
                                                                       #महेश गुप्ता’जौनपुरी'
परिचय : महेश गुप्ता का साहित्यिक नाम `जौनपुरी` है l आप राज उत्तरप्रदेश
के गनापुर (अजोशी,जौनपुर) में रहते हैंl शिक्षा बी.एस-सी. और राष्ट्रीयता भारतीय हैl आप हिन्दी भाषा को जानने के साथ ही मुख्य पेशे अध्ययन से जुड़े हैंl लेखन में आपकी मुख्य विधा-काव्य,कहानी,लघुकथा हैl आपकी रचनाओं की प्रकाशित पुस्तकोण में `नव काव्यान्जलि` है,जबकि पत्र-पत्रिकाओं में लेख छपते रहे हैंl आपके शौक एवं सपने यही हैं कि,अंतर्राष्टीय लेखन और समाजसेवा करेंl लेखन में पहला कदम २०१० में रखने वाले महेश गुप्ता चित्रकारी भी करते हैंl 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।