वेदना

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dinesh saini
है वेदना गर मेरे मन में,
क्यूं धीर बूंदें खो रही हैं।

क्यूं जागती हैं मेरे संग में,
जबकि वो सुख से सो रही है॥

सावन की ये ठंडी हवा क्यूं,

मुझे ज्येष्ठ की लू लग रही है।
है मन मेरा विरह अग्नि में तो क्यूं,
न लपटें चैन उसका खो रही है॥

आज क्षितिज पर भी क्यूं मुझको,
ये धरती-अम्बर न मिलते दिखते हैं।

प्रिय के बिना तो किसी का साथ ही न चाहता हूँ,
फिर भी न जाने क्यूँ ये धरती साथ मेरे रो रही है।

सोचा था मैंने जाम लूँ मैं,
कुछ पल तो उसकी याद बिसरे।

न जाने जुदा होकर के भी क्यूं,
मदहोश आँखें उसकी खातिर हो रही हैं॥

क्यूँ नजर आती है मुझको,
सारी ही सृष्टि ये व्याकुल॥

मैं हूँ ‘अकेला’ तो क्यूँ आँखें,,
यूँ बादलों की चोर रही हैं।।

है वेदना गर मेरे मन में,
क्यूं धीर बूंदें खो रही हैं।

क्यूँ जागती हैं मेरे संग में,
जबकि वो सुख से सो रही है॥
                                                                           #दिनेश सैनी ‘अकेला’
परिचय : दिनेश सैनी ‘अकेला’ हरियाणा से हैं। हिसार केमिर्जापुर रोड पर श्याम विहार में बसे हुए हैं। आप वर्तमान में शिक्षा में स्नातक में अध्ययनरत हैं। लेखन में काफी समय से सक्रिय हैं। श्री सैनी बारहवीं की पढ़ाई के समय से ही लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। गीत,कविता और गज़ल में विशेष रुचि है।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।