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परिवर्तन
Fri Jul 28 , 2017
परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है,इसमें ढल जाओ, बदलते परिवेश की जरूरत,हो तो बदल जाओ। कितनी भी लम्बी चाहे, हो रात काली गहरी.. छँट जाएगा अंधेरा, बन सूर्य-से निकल जाओ। पानी की तरह जीवन, है यारों मानो अपना.. कोई हो रंग चाहे, हर रंग में घुल जाओ। आशा है फ़िर […]

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