मातृभूमि

Read Time1Second
pradeepmani
वरेण्य मातृभूमि की प्रचंड पुण्यभूमि की अखंड साधना करें।
कश्मीर में प्रभुत्व शान्ति सौम्यता के भाव हों ये भावना करें॥
हिन्दुत्व का प्रभाव हो प्रचार हो,प्रसार हो न कि दुष्प्रचार हो।
कश्मीर है अभिन्न अंग देश का समग्रता से मन में ये विचार हो॥
माँ भारती के ताज में न आँच आ सके, कभी वतन में निज स्वराज हो।
ललकार गूँजते हैं स्वर,स्वराज संग दे सकें अगर तो हम सुराज हो॥
ये मानवीय प्राकृतिक सम्पदा अभिन्न है अमूल्य मूल्यवान है।
उदार हाँथ में प्रबंध,बंध हो,निबंध हो,ये विश्व में निधान है॥
ये हिन्द की धरा पवित्र पुण्य देवभूमि है जगत में ये महान है।
हमारे देश की धरा,वसुन्धरा,ये हमारी शान और आन बान है॥
अखंडता बनी रहे,प्रचंडता बनी रहे,विधर्म का विनाश हो।
विश्व मानवीयता,सनातनी परंपरा,हो पल्लवित विकास हो॥
विधर्म खंड-खंड हो,विध्वंस भी प्रचंड हो,चूर अब घमंड हो।
संघ शक्ति कलयुगे,विध्वंस न विखंड हो,माँ भारती अखंड हो॥
राणा शिवाजी के सदृश,ये हिन्द भूमि के युवा,शौर्य भी ज्वलंत हो।
शत्रु दल में चीत्कार,जब मचे है काट मार,नाद दिग् दिगंत हो॥
चलो कदम बढ़ा चलो,ऐ हिन्द देशवासियों,हम उत्सर्ग कामना करें।
मौत घाट दें उतार,शत्रु तार-तार हो,खून की नदी बहे,हम ये भावना करें॥
मौत भाग कर खड़ी,हम से है नहीं बड़ी,अविचल आराधना करें।
काल में अकाल में,दमक रहेगी भाल में,हम मृत्यु साधना करें॥
                                                                              #प्रदीपमणि तिवारी ‘ध्रुवभोपाली’
परिचय:भोपाल निवासी प्रदीपमणि तिवारी लेखन क्षेत्र में ‘ध्रुवभोपाली’ के नाम से पहचाने जाते हैं। वैसे आप मूल निवासी-चुरहट(जिला सीधी,म.प्र.) के हैं,पर वर्तमान में कोलार सिंचाई कालोनी,लिंक रोड क्र.3 पर बसे हुए हैं।आपकी शिक्षा कला स्नातक है तथा आजीविका के तौर पर मध्यप्रदेश राज्य मंत्रालय(सचिवालय) में कार्यरत हैं। गद्य व पद्य में समान अधिकार से लेखन दक्षता है तो अनेक पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होते हैं। साथ ही आकाशवाणी/दूरदर्शन के अनुबंधित कलाकार हैं,तथा रचनाओं का नियमित प्रसारण होता है। अब तक चार पुस्तकें जयपुर से प्रकाशित(आदिवासी सभ्यता पर एक,बाल साहित्य/(अध्ययन व परीक्षा पर तीन) हो गई है।  यात्रा एवं सम्मान देखें तो,अनेक साहित्यिक यात्रा देश भर में की हैं।विभिन्न अंतरराज्यीय संस्थाओं ने आपको सम्मानित किया है। इसके अतिरिक्त इंडो नेपाल साहित्यकार सम्मेलन खटीमा में भागीदारी,दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में भी भागीदारी की है। आप मध्यप्रदेश में कई साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।साहित्य-कला के लिए अनेक संस्थाओं द्वारा अभिनंदन किया गया है।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

आँसू मत बहाना...

Tue Jul 25 , 2017
मित्रों,समय-समय पर सीमा पर नापाक पाकिस्तान द्वारा कायरतापूर्ण तरीके से हमारे वीर जवानों की हत्या करके उनके शीश काटकर ले जाना अब आम बात हो गई है। ऐसा क्यूँ होता है,सुनिए एक भुक्तभोगी जवान शहीद हेमराज की जुबानी मेरे शब्दों में.. तर्ज-ऐ मेरे वतन के लोगों,जरा आँख में भर लो […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।