पितृमोक्ष अमावस्या

Read Time2Seconds
deenesh malviy
आज सुबह से ही घर खीर-पूरी की खुशबू से महक रहा था,सामने फुटपाथ पर एक औरत दो बच्चों के साथ सिमटी हुई बैठी थी। लगता था कुछ दिनों से भूखी हो,रसोईघर में जाकर एक प्लेट भर खाना लाकर महिला को देता हूँ,पत्नी पीछे से कहती है-अभी भोग नहीं लगा है। उन बच्चों की आंखों में भोग लगने की अनुभूति होती है,आज पिता की आत्मा को मोक्ष मिला है।
आज सुबह से ही घर पर पितृमोक्ष अमावस्या की तैयारी चल रही थी। हमारे कुलगुरु ने बताया था कि,अमावस्या के दिन काली गाय को खीर-पूरी खिलाने से पिता की आत्मा को शांति मिलेगी। हम घर से निकल ही रहे थे,देखा कि,झोपड़-पट्टी के दो बच्चे खाने के लिए गुहार लगा रहे थे। उन्हें दुत्कार कर,मां-बाप ने हमारे लिए ही पैदा कर छोड़ दिया है। चले आते हैं मांगने के लिए सुबह-सुबह भिखमंगे…।और गाड़ी चालू कर काली गाय की खोज में निकल पड़े।
                                                                               #दिनेश मालवीय ‘भोपाली’
परिचय : दिनेश मालवीय, मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में रहते हैं।आपका लेखन में उपनाम-भोपाली है। कर्म क्षेत्र शिक्षा विभाग यानि बतौर सहायक अध्यापक बच्चों का भविष्य गढ़ते हैं। आप संस्कृत भाषा से स्नातक होकर लेखन,पहलवानी और शतरंज को पसंद करते हैं।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

भोर का नमन

Mon Jul 17 , 2017
हे प्रेम प्रतीता पुण्य पुनीता,हे जननी सुखधाम.. मात-पिता के श्रीचरणों में,मेरा पुण्य प्रणाम। हे पुण्य सकारे गुरुवर प्यारे,तुम ही ज्योतिर्पुंज, प्रभु परमेश्वर हे जगदीश्वर,जीवन सत्य निकुंज। हे पुण्य मही हे अम्बर प्यारे,दिन दिनकर दिनमान, हे रजनीश्वर हे रत्नाकर,तरुवर परम सुजान। सकल चराचर मित्र सखा अरि,प्यारा प्रिय परिवार, नमन आपको करूँ […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।