बहु बिटिया

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घर छोड़ आई बाबुल का,जो गैरों के वास्ते।
मन से जिसने अपनाया,पिया के सब रास्ते।।
अज़नबी थे उनसे सब,नाते जोड़ रही है।
अपनों का संग प्यारी,बिटिया छोड़ रही है।।

नया घर नयी माँ,देवर,ननद,ससुर रूप में बापू को पाया।
क्या हम सबने उसे भी, बेटी सा अपनाया।
वो नन्ही चिड़िया,पुराना घरोंदा तोड़ रही है।
अपनों का संग प्यारी,बिटिया छोड़ रही है।।

अजनबियों के घर जाकर,क्या तुम कभी रह पाओगे।
अंजाने रिश्तों को एकदम,कैसे तुम अपनाओगे।
धीरे धीरे पीहर से वो,अपना मुख मोड़ रही है।
अपनों का संग प्यारी,बिटिया छोड़ रही है।।

बहु को बेटी समझो,वह तुम्हारी हो जायेगी।
अंत समय तक बिटिया बनकर,अपना फ़र्ज़ निभायेगी।
दहेज़ी हत्यारों की क्या?,आत्मा नहीं झंझोड़ रही है।
अपनों का संग प्यारी,बिटिया छोड़ रही है।।

#उपद्रवी
शशांक दुबे
छिंदवाड़ा

लेखक परिचय : शशांक दुबे पेशे से सहायक अभियंता (प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना), छिंदवाड़ा, मध्यप्रदेश में पदस्थ है| साथ ही विगत वर्षों से कविता लेखन में भी सक्रिय है |

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।