बापू

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अंधेरे में उजाला बापू आप हो!

पूरे डेढ़ सौ बरस हो गए बापू
चाहे जंगल हो या फिर टापू
लगातार आपकी ख़ोज जारी है
आप नही मिले यह लाचारी है
पहले न्याय मंदिरो में मिलते थे
जज के पीछे तस्वीरों में सजते थे
अब वहां भी तस्वीर बदल गई
लगता है सच्चाई ही खो गई
आपने तो अहिंसा सिखाई
फिर भी वह क्यों नही भायी
गोड़से ने अहिंसा को कुचल डाला
गोलियों से आपको भून डाला
‘हे राम ‘कहकर आप चले गए
हम यहां ठगे से ही रह गए
सोचते थे अहिंसा गुल खिलाएगी
हिंसा स्वयं ही मारी जाएगी
पर यहां तो हिंसा का बोलबाला है
जगह जगह रावण बस गए
बताओ राम कब आने वाला है?
रावणो की हिंसा गर चलती रही
हाथरस की बेटी दम तोड़ती रही
मानवता शर्मसार होती रहेगी
शिकार फिर कोई बेटी होती रहेगी
धैर्य अब बापू जवाब दे रहा है
अराजकता में हर कोई जी रहा है
जहां भी हो बापू चले आओ
अपने भारत को फिर से बचाओ
अंधेरे में उजाला बापू आप हो
अहिंसा के पुजारी बापू आप हो।
श्रीगोपाल नारसन
रुड़की (उत्तराखंड)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।