मेरी हर शाम उदास…

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rishabh radhe
सच तो ये है मेरी हर शाम उदास होती है,
अकेले में भी तुम्हारी यादें पास  होती हैl
एकांत की बात तो चलो दूसरी है साथी,
भीड़ में तन्हाई  मेरे आस-पास होती हैl
मुद्दतों से फिर रहा हूँ उस मंजिल की चाह में,
मगर वो मंजिल दूर होकर भी मेरे पास होती हैl
आने लगती है मुझे हिचकियां जब कभी,
वो चाहती है मुझे,दिल में एक आस होती हैl
खोजते-खोजते मुद्दतें गुजर गई लगता है,
काक बोले तो तेरे मिलन की आस होती हैl
छूती है जब पवन मुझको तब सुकून मिलता है,
ये पवन भी तेरी छुअन की  तरह  खास होती हैl
मन्नते मांगी है मैंने उस रब से तेरे आने की खातिर,
क्योंकि ‘महक’ तेरे बिन हर गली उदास होती हैl
लौट आओ तुम ‘ऋषभ’ का दिल नहीं लगता है,
सच कहता मुझे हर पल तुम्हारी तलाश होती हैl
                                                                                                           #ऋषभ तोमर(राधे)

परिचय : ऋषभ तोमर(राधे) मध्यप्रदेश के शहर अम्बाह (जिला मुरैना) में रहते हैंl इनकी आयु २० वर्ष है,और लिखने का शौक रखते हैंl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।