क्या अभी भी सोचते हो मैं लिखूँ शृंगार केवल वक़्त है क्या ये अभी भी जो लिखूँ मैं प्यार केवल आज के हालात मुझको कर रहे मजबूर इतना छोड़ कर करुणा दया बस मैं लिखूँ अंगार केवल हर जगह क्यों लग रही हैं जिस्‍म की अब बोलियाँ यूँ लुट रहीं […]

निज अधिकार समझके अपने मत का करले दान रे भइया चलो करे मतदान रे भइया चलो करे मतदान पाँच वर्ष पश्चात मिला है हम सबको फिर से मौका लोकतंत्र के महा पर्व में क्यों तुम सब अनजान बहना भाई चाची ताई दादा दादी सब सुनलो अबकी बढ़ चढ़के करना है […]

तुम्हारी याद जो आई तो मैं पैगाम लिखता हूँ मिटाकर के हथेली से पुनः तेरा नाम लिखता हूँ सदा खोया रहा तुम में चैन से सो नही पाया जो आई याद तेरी तो सनम मैं रो नहीं पाया वजह बस एक ही तो थी तुम्हारी आबरू की जाँ तभी तेरे […]

जमी बंजर में पौधा नेह का हम बो नही सकते ये झूठे प्यार के नातों को हम यूँ ढो नही सकते भले तालाब छोटा हो मगर अपनी जगह वो है समन्दर में कमल जैसे कभी भी हो नही सकते भले सुबह से लेकर शाम तक उजियारा दे कोई मगर रातों […]

ज़रा तुम मेरे पास आओ, तुमसे मिलना चाहता हूँ। तेरी सागर-सी आँखों में, खुद को देखना चाहता हूँ॥ तेरे लबों की मदिरा में, आज डूब जाना चाहता हूँ। शराब पीकर बहका नहीं, आज बहकना चाहता हूँ॥ तेरे आगोश में आकर, तुझमें मिलना चाहता हूँ। तुम मुझे खत लिख दो, खुद […]

मंजिल को दृष्टि में रखता…, सजग राहों में गिरता चलता…l खुशियां देता गम को सहता…, आँधी-तूफानों में निश्चल चलता…l छलता-छलता छलते जाता…, पाते-खोते चलते जाता…l प्यासा होकर प्यास बुझाता…, धोखों के ईंधन को खाता…l मंजिल को पाने राहों को टेरता…, मृगतृष्णा को मंजिल माने चलता राहगीर…l मंजिल को सफर का […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।