कालजयी साहित्यकार पुण्यस्मरण का १२६ वा आयोजन.

इंदौर ।
भाषा बोलन जानई, जिनके कुल के दास ।
तेहि भाषा कविता करी, जईमति केशवदास।।
श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति, इंदौर द्वारा कालजयी साहित्यकार पुण्यस्मरण श्रृंखला १२६ में आज ओरछा नरेश वीरसिंह के राजकवि और संस्कृत भाषा के प्रकांड विद्वान कवि केशवदास को उपस्थित विद्वत साहित्यकारों ने स्मरण किया.
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री राघवेन्द्र दुबे ने कहा कि संस्कृत और ज्योतिष के प्रकांड विद्वान प. काशीनाथ मिश्र के यहां जन्मे केशवदास को ओरछा नरेश इंद्रजीतसिंह ने इन्हें अपना गुरू मानकर २१ गांवों की जागीरी प्रदान की थी – ” गुरु करि मान्यो इंद्रजीत, तन मन कृपा बिचारी। ग्राम दए इक बीस तब, ताके पाय पखारि ।।
मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में ने बोलते हुए
श्री दिनेश दवे ने कहा कि अपनी प्रशंसा के एक पद पर बीरबल ने इन्हें ६ हजार रूपये की हुंडीया न्योछावर कर दी थी. एकबार इंद्रजीतसिंह ने अपने दरबार की प्रसिद्ध नर्तकी रायप्रवीण को मुगल दरबार में भेजने से इंकार कर दिया तो बादशाह ने इंद्रजीत पर १ लाख रुपए का जुर्माना कर दिया था तब केशवदास ने मुगल दरबार में जाकर वह जुर्माना माफ करा दिया था और रायप्रवीण को काव्य शिक्षा देने के लिए प्रसिद्ध ग्रन्थ कविप्रिया की रचना की थी
श्री भानु की केशव अलंकार वादी कवि थे उनकी भाषा क्लिष्ठ थी.
कार्यवाह प्रधानमंत्री घनश्याम यादव ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि उनके काव्य में बुंदेलखंडी के मुहावरों की अधिकता है साथ ही संस्कृत के शब्दों का प्रयोग बहुतायत में किया है.
डा अखिलेश राव ने बताया कि भगवान शंकर को तुलसी अर्पण नहीं की जाती है रामभक्त शाखा के कवि पर नाम केशव था वे भक्तिकाल के साथ, रीतिकालीन कवि भी थे. दिनेश दवे ने कहा कि केशवदास भाषा में कविता और स्त्री अगर दोष रहित हो तो जीवन का आनन्द आ जाता है.
प्रचार प्रमुख श्री अरविन्द ओझा ने कहा कि इनकी काव्य शैली के दो रूप हैं मुक्तक शैली और प्रबंध शैली.
राधिका इंगले ने बताया कि अलंकार कविताँ के कविता को श्रृंगार..
अभियंता श्याम सिंह ने कहा राम समान देवता और केशव सामन देव । कविप्रिया में रामचंद्रिका के दोहों को उद्धृत किया.
कीर्तिश धामारीकर शास्त्री ने कहा कि केशवदास की प्रसिद्ध कृति “रामचंद्रिका”में संवाद योजना अद्भुत है जो इनकी व्यंग प्रधान शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है. इनके काव्य में अंगद रावण संवाद, लक्ष्मण परशुराम संवाद इसके श्रेष्ठ उदाहरण हैं।
साहित्य मंत्री पद्मा सिंह ने आभार प्रदर्शन किया परीक्षा मंत्री ने. संचालन किया प्रसिद्ध साहित्यकार अर्पण जैन
”अविचल’ने किया।

