पुस्तक लोकार्पण सम्पन्न

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कोई रचना कभी कोई फैसला नहीं देती

इन्दौर। विगत दो दशकों में कहानी और उपन्यास ने कईं अप्रत्याशित मोड़ लिए हैं यह भारतीय वाग्मय के लिए अभूतपूर्व घटना है। ऐसे बदलाव के मध्य सदा प्रासंगिक रहने वाले विषय पर आया यथार्थपरक संग्रह हिंदी में कथा साहित्य के वर्चस्व की पैरवी करता है। हम सभी जानते हैं हिंदी में कथा साहित्य का बोल बाला रहा तो कमलेश्वर ,मोहन राकेश ,राजेंद्र यादव धर्मवीर भारती से लेकर से मन्नू भंडारी और मालती जोशी तक यह उनकी कहानियों की प्रासंगिकता का ही प्रभाव था। इस संग्रह की कहानियां भी उसी यथार्थ के प्रासंगिकता की बानगी है।
मुझे नहीं लगता कि संग्रह की रचनाएं कोई फैसला देती है बल्कि कोई भी रचना कभी कोई फैसला नहीं देती ये कहानियां किसी अदालती फैंसले से बहुत बड़ी हैं। भारतीय परिवारों में जिस दिन विवाह की असफलता प्रेम की असफलता के रूप में स्वीकार लिया जायेगा उस दिन विवाह विच्छेद जैसी त्रासदी समाप्त हो जाएगी। यह पूरी तरह से मानसिक खुराक का मसला है । यह व्यक्तव्य अग्निधर्मा की संपादक एवं साहित्यकार डॉ शोभा जैन ने अश्विन कुमार दुबे के कहानी संग्रह “सफल प्रेम विवाह की असफल दाम्पत्य कथाएं ” के विमोचन समारोह एवं चर्चा संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि कही। साहित्यकार अंतरा करवड़े ने पुस्तक पर विस्तार से चर्चा करते हुए प्रत्येक कहानी पर टिप्पणी की। कार्यक्रम की अध्यक्षता सूर्यकांत नागर ने की उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रेम, प्रेम विवाह, दाम्पत्य जीवन पर विस्तार से विभिन्न पहलुओं पर सूक्ष्म विश्लेषण प्रस्तुत किया।
क्षितिज साहित्य संस्था के बैनर तले संपन्न इस कार्यक्रम में संस्था से जुड़े साहित्यकार डॉ योगेंद्रनाथ शुक्ल, प्रभु त्रिवेदी, वसुधा गाडगिल, डॉ शोभा जैन एवं रश्मि चौधरी का उनके मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा घोषित सम्मान के लिए सम्मानित किया । सम्मानित किए जाने वाले साहित्यकारों के बारे में ज्योति जैन ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए सम्मान श्रृंखला का संचालन किया ।
इस अवसर पर संस्था अध्यक्ष सतीश राठी, दीपक गिरकर, सुरेश रायकवार, देवेंद्र सिंह सिसोदिया, प्रदीप नवीन, सदाशिव कौतुक, डॉ पुरुषोत्तम दुबे, किशन शर्मा कौशल, रघुराज स्वरूप माथुर और नगर के वरिष्ठ साहित्यकार उपस्थित रहे उपस्थित थे। महिलाओं की उपस्थिति इस कार्यक्रम में सर्वाधिक रही। कार्यक्रम का संचालन लेखिका रश्मि चौधरी ने किया । आभार संस्था के कोषाध्यक्ष सुरेश रायकवार ने माना।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।