कोरोना काल में 82 नवाचार एक अद्भुत रचनात्मक कार्य

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म. प्र. आगर मालवा जिले के उत्कृष्ट उ.मा. विद्यालय आगर मालवा के राज्यपाल पुरुस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. दशरथ मसानिया ने  कोरोना त्रासदी के विगत 15 महीनों में शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में सराहनीय सृजनात्मक कार्य किया है।
   जहां लोग कोरोना काल में भययुक्त वातावरण में जी रहे थे वहीं डॉ. मसानिया ने 82 चालीसा (शैक्षणिक गायन नवाचार) लिखकर छात्र और समाज हित में एक ऐतिहासिक कार्य किया है।इन चालीसाओं को राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं ने भी समय-समय पर अच्छा कवरेज दिया है जिससे देश-भर के पाठक लाभान्वित हुए हैं।नवाचारों की एक पुस्तक ‘ चालीसा गायन नवाचार’ भी उद्योग नगर प्रकाशन (ISBN 978-81-948072-0-9) गाजियाबाद ने प्रकाशित भी किया है।
इन चालिसाओं में 33 शैक्षणिक,15 धार्मिक,11 महापुरुषों पर,10 साहित्यकारों पर, 6 लोक देवताओं पर तथा 7 महिला सशक्तिकरण पर आधारित है।
शैक्षणिक चालीसा छात्रों में स्वाध्याय के प्रति बढ़ रही अरुचि को दूर कर संबंधित विषयों पर गागर में सागर भरने का कार्य कर रहे हैं। धार्मिक विषयों पर केंद्रित चालीसा धर्म ग्रंथों, लोक साहित्य एवं पौराणिक कथाओं में वर्णित महापुरुषों के बारे में सहज, सरल व सटीक जानकारी को कम समय में उपयोगी साबित हो रहे हैं। महापुरुषों पर आधारित चालीसाओं में देश विदेश के विख्यात महपुरुषों की जीवनी के बारे में जानकारी देकर युवा पीढ़ी के चरित्र निर्माण में नैतिक उत्थान का कार्य बखूबी कर रहे हैं। महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित चालीसाओं में समाज की आधी आबादी के सामयिक उत्प्रेरण हेतु समाज में उल्लेखनीय योगदान हेतु समुचित उत्साहवर्धन का अनूठा कार्य किया गया है। पुस्तक का आवरण मौलिकता लिए हुए विषयानुकूल है।
सभी चालीसाओं में कवि ने नई शिक्षा नीति को ध्यान में रखते हुए गायन नवाचार के रुप में छात्रहित के लिए जो कार्य किया है उसे सराहा जाना चाहिए। पुस्तक को सहायक पुस्तक के रुप में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है डॉ.मसानिया के 6 विश्वरिकॉर्ड महाराष्ट्र रिकार्ड्स आप बुक में दर्ज किया है। कवि मसानिया को इस सफल नवाचार से छात्रों के समय बचत करने वाले उन्नयन की जितनी प्रशंसा की जाए, वह कम है। कवि का यह अनूठा सार्थक  प्रयास छात्र हित में मील का पत्थर साबित होगा। कवि के उज्जवल भविष्य की कामनाओं के साथ कोटिशः बधाइयां।
 प्रो.अमर सिंह,विभाग अध्यक्ष अंग्रेजी,शासकीय महाविद्यालय  चांद,छिंदवाड़ा म. प्र.

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।