स्थ्य मंत्रालय जनभाषा में नहीं, अंग्रेजी में देता सभी सूचनाएँ और ख़बर।

0 0
Read Time4 Minute, 12 Second

विषय- भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अंग्रेजों के लिए काम करने व राजभाषा अधिनियम का शत्-प्रतिशत् उल्लंघन करने पर परिवाद।

महोदय,
कोविड काल में भारत सरकार आम जनता के लिए कई योजनाएँ बना रही है, अभियान चला रही है पर उनका लाभ आम नागरिकों तक बहुत कम पहुँच रहा है क्योंकि-

  1. कोरोना काल में स्वास्थ मंत्रालय द्वारा सभी योजनाएँ, इनके प्रपत्र, मोबाइल एप व वेबसाइट आदि केवल अंग्रेजी में बनाए जा रहे हैं।
    2, योजनाओं के नाम अंग्रेजी में रखे जा रहे हैं, केंद्र सरकार के अधिकारियों का अंग्रेजी दुराग्रह ही है यह जो आम जनता पिस रही है।
  2. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा कोरोना काल में राजभाषा अधिनियम का लगातार उल्लंघन किया गया है पर कोई सुनने वाला नहीं है। मैंने अप्रैल 2020 से अप्रैल 2021 तक लोक शिकायत पोर्टल, ईमेल व ट्विटर पर लगभग 100 शिकायतें कीं पर इस मंत्रालय के अधिकारियों ने एक भी शिकायत पर कार्यवाही नहीं की। अन्य नागरिकों ने भी सैकड़ों शिकायतें भेजी हैं, जिन पर मंत्रालय की ओर से कोई उत्तर 1 साल में भी नहीं दिया गया है।
  3. कोरोना बीमारी के संबंध में इस मंत्रालय ने एक भी आधिकारिक दस्तावेज राजभाषा में जारी नहीं किया है।
  4. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा हिन्दी भाषी राज्यों को सभी पत्र, परिपत्र, कार्यालय ज्ञापन आदि केवल अंग्रेजी में जारी किए जा रहे हैं।
  5. कोरोना टीकाकरण का प्रमाण-पत्र नियम 11 का उल्लंघन करते हुए जारी किया जा रहा है।
  6. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पत्र सूचना कार्यालय को गत् 1 साल में एक भी विज्ञप्ति हिन्दी भाषा में जारी नहीं की है।
  7. टीकाकरण के लिए मोबाइल एप व वेबसाइट www.cowin.gov.in/केवल अंग्रेजी बनाए गए हैं, जिसके कारण देश के करोड़ों अंग्रेजी न जानने वाले इसका उपयोग करने से वंचित हैं और यह राष्ट्रपति जी के 2 जुलाई 2008 के आदेश का उल्लंघन है जिसमें साफ कहा गया है कि भारत सरकार की हर वेबसाइट राजभाषा हिन्दी में बनाई जाए।
  8. नियम 11 का उल्लंघन करते हुए मंत्रालय द्वारा सभी स्थायी बैनर, पोस्टर व मेज नामपट्ट केवल अंग्रेजी में तैयार करवाए गए हैं।
  9. कृपया यह भी जाँच करवाएँ कि गत् 1 साल से इस मंत्रालय के राजभाषा अधिकारियों से ऐसा क्या काम करवाया जा रहा है कि उनके होते हुए दस्तावेज राजभाषा में जारी नहीं किए जा रहे हैं?

इन सभी बातों से सिद्ध होता है कि भारत का स्वास्थ्य मंत्रालय अंग्रेजों के लिए काम कर रहा है पर राष्ट्रवादी सरकार के होते हुए एक स्वयंप्रभु देश का मंत्रालय अंग्रेजों के लिए काम क्यों कर रहा है? आशा है आप हमारी असुविधा, परेशानी व कष्ट को समझेंगे।

आपसे अनुरोध है कि ऐसा मत होने दीजिए। यह सरासर भेदभाव है। हम अंग्रेजी न जानने वाले नागरिक कहाँ जाएँ, किससे गुहार लगाएँ?

भवदीय
अभिषेक कुमार

matruadmin

Next Post

जीवन का गणित

Wed Apr 14 , 2021
जीवन एक कठिन गणित है। इसमें कहीं जोड़ तो कहीं घटाना पड़ता है। इसमें गुणा और भाग को समान अवसर मिलता है। भिन्न भिन्न के भी अंश होते हैं। हर हर के अंदर होता है। इन सब के अतिरिक्त कुछ अजीब बातें हैं इस ज़िंदगी रूपी गणित में- जोड़ तो […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।