जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे

0 0
Read Time2 Minute, 12 Second

जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे ,
मत कर तू झूठा अभिमान बन्दे।
झूठी है ये काया,झूठी है ये माया,
मत कर तू इस पर गुबान बन्दे।।

न कुछ लाया था,न कुछ ले जायेगा,
मरने के बाद यही सब रह जायेगा।
किसके लिए ये कुछ जोड़ रहा तू बन्दे,
तेरा शरीर भी मिट्टी में मिल जाएगा बन्दे।।
जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे।।

जीते जी अच्छे काम कर ले बन्दे,
मत पड़ तू माया के इस फंदे मे।
माया बनी मकड़ी का जाल बन्दे,
इसमें फसके मर जायेगा तू बन्दे।
जप ले प्रभु का नाम तू अब बन्दे।

झूठे हैं इस दुनिया के रिश्ते नाते,
जीते जी भाते है ये सबको नाते।
मरने के बाद टूट जायेंगे ये नाते,
भूल जायेगी ये दुनिया सब नाते।।
जप ले प्रभु का नाम भूल जा ये नाते।
जप ले प्रभु का नाम तू अब बन्दे।।

ऊंचे ऊंचे तूने ये महल है बनाऐ,
मरने के बाद ये तेरे काम न आए।
मिलेगी न दो गज जगह तुझको,
फिर क्यों तूने झूठे स्वप्न सजाए।।
स्वप्न छोड़ भज ले प्रभु का नाम बन्दे।
भज ले प्रभु का नाम अब तू बन्दे।

कोरोना का ये दौर है छाया,
टूट रही है इससे सबकी काया।
कहीं जल प्रलय पड़ रही भारी,
कहीं हो रही बर्फ़ की मारामारी।
ये प्रकृति का सब खेल है बन्दे,
भज ले प्रभु का नाम तू बन्दे।।

पढ़ा है तूने त्रिकोण षटकोण बन्दे,
पढ़ा नहीं जीवन का दृष्टिकोण बन्दे।
बदल ले जीवन का दृष्टिकोण बन्दे
नकारत्मक से सकारत्मक हो बन्दे
फिर न मिलेगा समय तुझे ये बन्दे
भज ले प्रभु का नाम तू बन्दे।
जप ले प्रभु का नाम तू बन्दे।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

matruadmin

Next Post

फटी जींस फैशन है या और कुछ और

Fri Mar 26 , 2021
पिछले दो-तीन दिनों से फटी हुई जींस को लेकर मीडिया व अखबारों में काफी चर्चा बनी हुई है और मुझे भी लगता है कि फैशन करने में बुराई नहीं है पर उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत जी ने जींस का रिश्ता लड़िकयों के संस्कार से जोड़ दिया। इसके […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।