रेखा

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जाने कौन-सा धन
मुझमें देखा!
जाने क्यूँ
मुझसे रुठ गई
गरीबी रेखा।।
लाख चाहा मैंने
इसके नीचे आऊँ,
इसके कदमों तले
बिछ जाऊँ
और पा जाऊँ
छोटा कूपन,
अब नहीं
सही जाती मुझसे
मँहगाई की तपन।।
हे ! गरीबी की रेखा माता
मुझ पर तू
हो जा प्रसन्न,
ताकि मैं भी खा सकूँ
एक रुपए किलो
अन्न।।
ये मँहगाई की मार
खा-खाकर
अब आने लगे हैं-चक्कर,
अब मेरा भी
मुँह मीठा करवा दे
दिलवा दे
शासकीय राशन दुकान से
शक्कर।।
यही अरज् है मेरी
बदल दे मेरी तकदीर,
बनवा दे मेरी भी
प्रधानमंत्री आवास योजना वाली
कुटीर।।
थक गया हूँ-मैं
काम कर-करके
हो गया हूँ-सुस्त ,
मुझे आज तक
नहीं मिली
कोई चीज़ मुफ्त।।
मेरी अंतिम ईच्छा
पूरी कर दे,
तुझसे निवेदन करुँ-मैं
अपनी आँखें मीचे !
एक बार तो ले-ले
हे ! गरीबी रेखा
मुझे अपने नीचे।।
—–रामशर्मा ‘परिन्दा’, मनावर
            #रामशर्मा ‘परिन्दा’

परिचय : रामेश्वर शर्मा (रामशर्मा ‘परिन्दा’)का परिचय यही है कि,मूल रुप से शासकीय सेवा में सहायक अध्यापक हैं,यानी बच्चों का भविष्य बनाते हैं। आप योगाश्रम ग्राम करोली मनावर (धार, म.प्र.) में रहते हैं। आपने एम.कॉम.और बी.एड.भी किया है |

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।