खिलौने संग

Read Time1Second
नहीं छोड़ पाया अपने खिलौने
का मोह वो बालमन,
छीना-झपटी करते रहे घण्टों
एक-दूसरे के संग।
नजर मेरी टकटकी लगाए देख
रही थी उनके गुन,
सहसा एक किनारे जा खड़ा हुआ
वह शिशु खिलौने संग।
माँ बुलाती रही बाबू आ जाओ,
वह अनसुनी सी करता।
मोह था उसे अपने खिलौने संग,
बाँटना नहीं था दूजे संग।
माँ के समीप जाने पर और तेजी
लाता कदमों संग,
बहला-फुसलाकर माँ वापस लाती
करती बच्चों संग।
कुछ बिस्किट और फ्रूटी देती सबको
गिर न जाए कपड़ों पर
सीधे मुँह के अन्दर देती,
उत्साह दूना हुआ बच्चों का
खेल के संग।
सबकी नजरें बच्चों पर ही टिकती,
माँ को था मोह बच्चे से
व्यथित हुई चिन्तित हुई बोली अपनी
सखी से,घर जाकर
राई-नोन से नजर उतारना होगी।
सबकी नजरें है बच्चों संग।।
॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥॥—-शालिनी साहू, रायबरेली

परिचय : शालिनी साहू इस दुनिया में १५अगस्त १९९२ को आई हैं और उ.प्र. के ऊँचाहार(जिला रायबरेली)में रहती है। एमए(हिन्दी साहित्य और शिक्षाशास्त्र)के साथ ही नेट, बी.एड एवं शोध कार्य जारी है। बतौर शोधार्थी भी प्रकाशित साहित्य-‘उड़ना सिखा गया’,’तमाम यादें’आपकी उपलब्धि है। इंदिरा गांधी भाषा सम्मान आपको पुरस्कार मिला है तो,हिन्दी साहित्य में कानपुर विश्वविद्यालय में द्वितीय स्थान पाया है। आपको कविताएँ लिखना बहुत पसंद है।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

न डर होना चाहिए

Sat May 27 , 2017
न समुन्दर की गहराई का कभी डर होना चाहिए, न आराम करने के लिए कभी घर होना चाहिए। यदि पाना है तुम्हें सूरज की ऊँचाईयों-सी सफलता, तो बाप की ऊँगली पकड़कर सफर होना चाहिए। ——-#सुरेन्द्र ठाकुर ‘अज्ञानी’                           […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।