गंगा जल भी तो लगता खार

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krishn
इतना ग़म ने भी मुझको मारा है।
हाय क़िस्मत को क्या ग़वारा है।।

चलते रहना तू सच की राहों में।
झूठ सच से सदा ही हारा है।।

कितने आरोप तुम लगा डालो।
मुझको सच का बड़ा सहारा है।।

कैसे नेताओं पे यक़ीन करुं।
खा लिया भैंस का भी चारा है।।

पाप अब कितना बढ़ गया देखो।
गंगा जल भी तो लगता खारा है।।

झूठ जीवन में मत कभी बोलो।
‘राज’ का आज यह ही नारा है।।

                                                                 #कृष्ण कुमार सैनी ‘राज’

परिचय : मंच संचालन के शौकीन और माहिर कृष्ण कुमार सैनी ‘राज’ ने एमए(राजनीति विज्ञान) और बीएसटीसी(जयपुर) की शिक्षा हासिल की है।२२ वर्ष के कृष्ण पिता कन्हैयालाल सैनी फूलों का व्यवसाय करते हैं। दौसा (जिला दौसा, राजस्थान) में रहने वाले कृष्ण की रुचि कविता,गजल,गीत,शायरी, मुक्तक,व्यंग्य लिखने में है।आपको भजन-कीर्तन सुनने का शौक है। इनकी साहित्यिक उपलब्धियों में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करने का और सम्मानित होने का सौभाग्य है तो ही, दौसा (राजस्थान) में हुए कवि सम्मेलन में भी काव्य पाठ कर लिया है। कई कवि सम्मेलन में काव्यपाठ एवं चंचरीक स्मृति सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।