लगा लो गले

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sourabh
टूटे हुए दिल को फिर से जोड़ने आया हूँ,
मैं तुम्हारे दिल में घर अपना बनाने आया हूँ।

तुम रुठी रहो मुझसे अनोखे से अंदाज में,
मोहब्ब्त भरे अंदाज से तुम्हें मनाने आया हूँ।

गई थी तुम,मेरी चाहत की गली छोड़कर,
आज अपने दिल में तुम्हें बसाने आया हूँ।

ओ प्रिये,अब मान भी
जाओ,
प्यार भरी कायनात
साथ लाया हूँ।

वादा है कभी होगा नहीं जहाँ पतझड़,
मोहब्बत की सौगात साथ लाया हूँ।

तुम्हारे सिवा बची नहीं कोई चाहत,
हसरतों के सब द्वार बंद कर आया हूँ।

लगा लो गले,भर लो न मुझे बाँहों में,
साँसों की बहुत थोड़ी मोहलत लाया हूँ।

अटकी है जान बस तुम्हारी नजर को,
खुदा से जिंदगी को,दो पल उधार लाया हूँ।

                                                                         #सौरभ जैन(उज्जवल)

परिचय : रचनाकार बनाने की दिशा में सौरभ जैन का प्रयास जारी है। रामपुर मनिहारिन( जिला-सहारनपुर) के निवासी हैं और बी.कॉम.कर लिया है। २२ वर्ष के सौरभ शायरी व छंदमुक्त काव्य रचना को अधिक पसंद करते हैं।

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।