मेहबूब का साथ

Read Time0Seconds

पूणिमा की चांदनी रात में
मेहबूब को लेकर साथ में।
चले जन्नत में मोहब्बत
करने के लिए वो।
मेहबूब के पैरों में कही
कोई कांटा न चुभ जाये।
तभी तो चांद ने बगीचे में
मोतियो को बिछा दिये।।

जैसे ही पढ़े कदम मेहबूब के
जन्नत के बाग में।
मुरझाए लताएं भी स्पर्श से
फिर से खिल उठी।
और ठंडी हवाओ ने
फिर खुशबू बेखर दी।
और प्यार के सागर में
अमृत को खोल दिये।।

होठो लालिमा गुलाब की
तरह खिल रही है।
आंखों से मोहब्बत का
नशा बरस रहा है।
और वदन से चंदन की
खुशबू महक रही है।
सही मायनों में हम
जन्नत में रह रहे है।।

बालो की काली घटायें
लजा दिखा रही है।
और सबकी नजरों से
मेहबूब को छुपा रही है।
की कही और की नजर
मेहबूब पर पड़ न जाये।
इसलिए अपने आँचल के
पल्लू से उसे छूपा रही है।।

मोहब्बत का जाम पीने को
हर किसी को नहीं मिलता।
अपनी मेहबूबा का साथ
नसीब वालो को ही मिलता।
बदनसीब होते है वो जिनकी
जिंदगी में मेहबूब नहीं होता।
और जन्नत में अमृत का रस
पीने को नही मिलता।।

जय जिनेन्द्र देव
संजय जैन (मुंबई)

0 0

matruadmin

Next Post

विश्व मानसिक स्वास्थ दिवस

Sun Oct 11 , 2020
जीवन की आपाधापी में, हम कुछ ऐसे व्यस्त हुए। फिकर रही ना स्वास्थ्य की, हम कुछ ऐसे मस्त हुए। क्या है अच्छा ,क्या है बुरा, इसकी परख ना हमने की। बांधकर पट्टी आंखों पर, भेड़ चाल है हमने चली। सारे एशो आराम की खातिर, खूब कमाई हमने की। तन तो […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।