सरल गणित चालीसा

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बुद्धि विकसित कीजिये,कीजे जन कल्याण।
गणित ज्ञान को गाइये, कहत हैं कवि मसान।।

जयजयजय गणित महाराजा।
सब जग बाजे तुम्हरा बाजा।।१
सब विषयों पर पड़ते भारी।
तुमसे डरती दुनिया सारी।।२
सब प्रश्नों को करत विचारी।
फिर भी नंबर की लाचारी।।३
कंप्यूटर के तुम ही दाता ।
जन जन के हो भाग्य विधाता।।४
भौतिक ज्योतिष तुमसे आये।
इस्टेटिसका अलख जगाये।।५
अंक गणित अंकों की माया।
बीजगणित में बीजक छाया।।६
क्षेत्रमिति आकार बनाती।
ज्यामिति रेखा गीत सुनाती।।७
आयत वृत्त शंकु घन गोला।
त्रिज्या परिधी परिमप तोला।८
रेखा टेढ़ी सरल कहाई।
दोनों ओर अनंता जाई।।९
रेखा लंबी सीमित खंडा।
बिंदु निशाना गोला अंडा।।१०
किरणें एक दिशा को जाती।
दो किरणें मिल कोण बनाती।।११
नब्बे सम असी सरल कहाये।
नीचे न्यूना अधिक बनाये।।१२
दो मिल नब्बे पूरक मानो।
एक असी संपूरक जानो।।१३
एक बिंदु से रेख अनेका।
दो से मिलकर होती एका।।१४
तीन मिले तिरभुज बन जाता।
चार चतुर्भुज भी कहलाता।।१५
तिरभुज तीनों अंतः कोणा।
योगा एक असी का होना।।१६
कोष्ठक के हैं चार प्रकारा।
रेखा लघु मझला बड़ भारा।।१७
संख्या भेद बहुत है भाई।
सम विषमा पूरण कहलाई।।१८
प्राकृत पूर्णक दशमलव भिन्ना।
भाजअभाज्य परिमय खिन्ना।।१९
दो से कटती सम कहलाती।
नही कटे विषमा हो जाती।।२०
एक छोड़ न कटे किसी से।
अभाज्य संख्या हि खुदी से।।२१
लघुतम महतम औसत जानो।
गुणनखंड को भी पहिचानो।।२२
सब संख्या का योगा कीजे।
भाग करी के औसत लीजे।।२३
प्हाड़े इकाइ नौ जहं आते।
इकाई घटते क्रम बनाते।।२४
उन्निस उनतिस उनसठ आई।
उनविधि बहुत सरल है भाई।।२५
यह विद्या दशरथ अपनाई।
सौ तक प्हाड़े तुरत बनाई।।२६
जोड़ घटाव गुणा अरु भागा।
गिनती प्हाड़े सीखो आगा।।२७
धनधन ऋणऋण धन कहलाते।
धनऋण ऋणधन ऋण बनजाते६
जोड़ गुणा घट दायें कीजे।
भाग सदा बायें से दीजे ।।२९
आर्यभट्ट की करो बड़ाई।
खोजा सीफर अंक बनाई।।३०
बायें जीरो कीमत नाही।
लागे दायें दस गुण भाई।।३१
क्रयविक्रय अरु हानि लाभा।
बट्टा मूला करते भागा ।।३२
सेमी मीटर लंब कहाई।
तौला ग्रामा भार इकाई।।३३
बरस महीना दिनभीआते।
घंटा मिनटे समय बताते।।३४
समीकरणें बैलेंस बनाती।
बीजक का वे भेद दिखाती।।३५
चरअचरा बहुपद को जाने।
अनुपाती संपाती माने।।३६
मूल समय दर गुणा लगावे।
सौ से भाग हि ब्याज बतावे।।३७
मिश्रधना से मूल घटाना।
ब्याज राशि को पूरी पाना।।३८
गणितज्ञान को जिसने जाना।
दुनिया ने उसको पहिचाना।।३९
प्यारे बच्चों अब मत डरना।
खेल समझ गणित को करना।४०

बाइस दिस को गणितदिन, रामानुज पहिचान।
दिन तो छोटा होत है, लंबी रात मसान।।

डॉ दशरथ मसानिया
आगर मालवा

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