पंक्षी

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सुबह उड़ते-उड़ते पंक्षी बोले,
प्यारे बच्चों क्या हाल-चाल हैं।
सुबह से तुम लिखते रहते हो,
सचमुच सब बच्चे कमाल हैं।।

बच्चों कुछ लिखो हमारे बारे में भी,
हम कठिन दौर से गुजर रहे हैं।
हमकों खाना कहाँ मिलेगा अब,
धरा पर मानव जंगल काट रहे हैं।।

तोता मैना चिड़िया कोयल सारे,
इसी सोंच में हम सब हैं भारी।
मानव हमारा घर उजाड़ रहा,
आखिर क्या गलती थी हमारी?

जब न होंगे इस धरा पर जंगल,
कहाँ होगा फिर बसेरा हमारा?
बच्चों तुम सबको यह समझाना,
न होंगे पेड़, तो न होगा जहाँ हमारा।।

नवनीत शुक्ल(शिक्षक)
रायबरेली (उत्तर प्रदेश)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।