रास्ते में मां

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छोटा बेटा जब लेने आया तो मां को यह समझ आ गया था कि बङ़े बेटे के यहां रहते हुए एक महीना बीत गया है।

शरीर में शक्ति नहीं थी,मन बैचैन हो रहा था, दिल बैठा जा रहा था, ऐसे में छोटे बेटे के घर सीढ़ियां चढ़ाना वश में नहीं लग रहा था उसे।”बेटा, दो दिन बाद ले जाना आज हिम्मत नहीं है” कहते हुए मां ने बेचारगी भाव से बेटे का हाथ पकड़ लिया।

“पर ये कैसे संभव है मां, मैं अॉफिस से आधे दिन की छुट्टी लेकर आया हूं। भैया-भाभी की भी बाहर जाने की प्लानिंग पहले से तय है।ये बैचैनी तो रोज रहती है तुम्हें” कहते हुए छोटे बेटे ने मां का हाथ पकड़ झटके से उठा लिया।

मां ने गीली आंखों को पोंछते हुए अपनी पोटली उठा ली।

अभी मां-बेटे के साथ रास्ते में ही थी कि बङ़े घर का बुलावा आ गया और मां एक हिचकी के साथ उधर ही मुङ़ गई।

तीये की बैठक में लोग पूछ रहे थे- मांजी कहां थी, बङ़े बेटे के पास या छोटे के पास।

दोनों बेटे एक-दूसरे का मूंह देख रहे थे। कैसे कहते- मां रास्ते में थी।

डॉ पूनम गुजरानी
सूरत

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।