सैनिक की तपस्विनी मां की गाथा

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“सोचता हूं……. मेरी मां तूने है बहुत कष्ट पाए,तेरे ऊपर है दुखों घनघोर बादल छाए, गरीबी में सारा अपना बचपन गुजार दिया।।

“सोचता हूं……किया सर्वस्व तूने न्योछावर भर जवानी में, पिता,
भाइयों के घर को संवारने में अपना बहुमूल्य समय गुजार दिया।।

“सोचता हूं…… जब भर जवानी की दहलीज में पति का साया तेरे
घर से उठा, छिन- भिन हुई तू , हृदय ने तेरी वेदना को पुकार दिया।।

“सोचता हूं…… विधवा असहाय होकर नन्हे तीन बच्चों को गरीबी में
तूने दूसरों के घर मजूरी कर दुविधा में , कैसे दुख भरा समय थाम दिया।।

“सोचता हूं…..अकेली ही तू चलती रही कष्टों की राहों में,कभी अपनों की ठोकर खाकर, कभी पारायों की तभी भरे समाज ने तुझे बाहर निकाल दिया।

“सोचता हूं….. कैसे निकली होगी तेरे चित् से करुणामय चितकार, तू कहती गर्जना से,मां भारती जा अबकी तुझे ,मैंने अपने दोनों लालों को उधार दिया।

“सोचता हूं….. सूने आंगन में,हर दिवाली में ,ओझल हुए तेरे दोनों लाल नजर से, तो क्या सैनिकों ने नहीं, तेरी ही कोख से दो क्षत्रियों ने है अवतार लिया।

“सोचता हूं…… शर्म नहीं तेरे अपनों को तुझे आज कैसे दुत्कार दिया, मैं कहता हूं फिर, इतना सब होने पर आज तूने अपने को कैसे संवार दिया।

ठाकुर तारा
सुन्दर नगर(हिमाचल प्रदेश)

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matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।