ओ धरती के फरिश्ते…

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ओ धरती के फरिश्ते
वाह री तेरी खुदाई
हर कहीं कत्लेआम मचा है
मर रहा है आदमी
सिसक रही हैं माँ की गोदी
तड़फ रहे है नन्हें बच्चे
टूट रही है सुहागिनों की चूड़ियां
भूख से बिलबिला रहा है आदमी
हर तरफ बस मातम पसरा है यहां मातम पसरा है यहां
फिर भी
ओ धरती के फरिश्ते
यह तेरा कैसा सम्मोहन है
कि पत्थरों को तराशते
और तेरा रूप देते हैं
यह पत्थर दिल
मरती हुई मानवता पर
अट्टहास करती सत्तायें
अपने खुदा होने का
हर प्रमाण
प्रमाणित करती हैं
कैसी है ये
स्वलालसा
कैसी है ये
उत्कंठा
कैसा है ये
न्याय
ढूंढती है यह
कायनात
सारी तुझे उन
बेजान से चट्टानों के
अभिलेखों में
इतिहास के जर्जर भवनों में
शायद तू भी
अपने होने की
पुष्टि चाहता है
तभी तो उन पत्थर दिलों को को
अपना
वरदान देता है
और मानवता के
चीत्कार
पर अपनी मौन
स्वीकृति देता है।

स्मिता जैन

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Mon Aug 10 , 2020
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।