महादेवी ने राखी बांधी सूर्यकांत निराला चालीसा

Read Time0Seconds

शारद सुत को नमन करुं, कीना जग परकाश।
सूर अनामी गीतिका, परिमल तुलसीदास।
अणिमा बेला अर्चना, चमेली अरु सरोज।
गीत कुंज आराधना, सूरकांत की खोज।।

हिन्दी कविता छंद निराला।
सूर्यकांत भाषा मतवाला।।1
बंग भूमि महिषादल भाई ।
मेंदनपुर मंडल कहलाई।।2
पंडित राम सहाय तिवारी।
राज सिपाही अल्प पगारी।3
इक्किस फरवरी छन्नु आई।
पंच बसंती दिवस सुहाई।।4
बालक सुंदर जन्मा भाई।
सकल नगर में बजी बधाई।।5
जनम कुंडली सुर्ज कुमारा।
पीछे सूर्यकांत उच्चारा।।6
बालपने में खेल सिखाया।
कुश्ती लड़के नाम कमाया।।7
हाइ इस्कूल करी पढ़ाई।
संस्कृत बंगला घर सिखलाई ।।8
धीरे-धीरे विपदा आई।
संकट घर में रहा समाई।।9
तीन बरस में माता छोड़ा।
बीस साल में पिता विछोहा।।10
पंद्रह बरस में ब्याह रचाया।
वाम मनोहर साथ निभाया।।11
पत्नी प्रेरित हिंदी सीखी।
सुंदर रचना रेखा खींची।।12
शोषित पीड़ित कृषक लड़ाई।
छोड़ नौकरी करी भलाई।।13
चाचा चाची भाई नारी।
भावज भी खाई महमारी।।14
बेटा बेटी पिता कहाये।
सन पैंतीसा लखनउ आये।।15
फटी कमीजा मोटी धोती ।
टूटी चप्पल हाथन पौथी।।16
सिर पे केशा लंबी दाढ़ी।
जीवन साधु वेश भिखारी।।17
तन से भारी मन से चंगा ।
कष्ट उठाया साहित्य संगा।।18
फक्कड़ जीवन उच्च विचारा।
मां शारद का बेटा प्यारा।।19
समन्वया संपादन कीना।
मतवाला में भी कुछ दीना।।20
जन्म भूमि का वंदन कीना।
पहली कविता मासिक जूना।।21
बंग भाष उच्चारण लेखा।
पहला निबंध जगत ने देखा।।22
सरस्वती अक्टूबर बीसा।
पहला लेख कसावट फीका।।23
यथार्थ कविता भाव दिखाती।
दर्शन से छाया कहलाती।।24
कुकुरमुत्ता में महिमा गाई।
आम जनों की पीर समाई।।25
राम की शक्ति पूजा भाई।
भाषा कठिन तत्व गहराई।।26
सरोज स्मृति करुणा गाथा ।
आंखों आंसू छोड़ा साथा।।27
बिन औषधि के त्यागी देही।
पैसा के बिन कवि विद्रोही।28
तू दीवाना तू मतवाला।
मानववादी कवी निराला ।29
औढर दानी जन कल्याणी।
सरल हिया अरु सांची वाणी।।30
कान्यकुब्ज की रीति तोड़ा।
दीन दुखी से नाता जोड़ा ।।31
जग हित घर में आग लगाई।
प्रगतीवादी कवी कहाई।।32
हे शारद सुत हे तिरपाठी।
भूखे बिसरों का तू साथी।।33
तोड़त पत्थर नारी देखी।
सारा चित्रण कविता लेखी।।34
महदेवी ने राखी बांधी ।
साहित्यजीवन की थी साथी।।35
देवी शंकर पंत निराला।
चारो खंबा छाया वाला।।36
काव्य जगत ने करी बड़ाई।
कविता छंदों मुक्त कराई।।37
भीष्म ध्रुव प्रह्लाद प्रतापा।
बालसाहित्य लिखा है आपा।।38
चाबुक चयन निबंध प्रबंधा।
चतुरी लिली कहानी बंधा।।39
अलका कुल्ली बिल्ले काले ।
उपन्यास भी खूब निराले।।40

सन उन्नीसो इकसठा, सूरज का प्रस्थान।
इलहबाद सूना लगे,कहत हैं कवि मसान।।

डॉ दशरथ मसानिया

आगर मालवा मध्य प्रदेश

3 0

matruadmin

Next Post

पहले सुरक्षा बंधन,फिर रक्षाबंधन

Sun Aug 2 , 2020
कोरोना काल में बदला त्यौहारों का स्वरुप रिश्ते – नाते बदले , बदली छांव और धूप । गूगल मीट पर बांंध दिया बहन ने रक्षासूत्र आश्चर्य चकित रह गया भाई देख नया रुप ।। ऑनलाइन नजर उतारती बहना बला हो दूर दीर्घायु हो मेरा भैय्या , स्नेह बना रहें भरपूर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।