पहले सुरक्षा बंधन,फिर रक्षाबंधन

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कोरोना काल में बदला त्यौहारों का स्वरुप
रिश्ते – नाते बदले , बदली छांव और धूप ।
गूगल मीट पर बांंध दिया बहन ने रक्षासूत्र
आश्चर्य चकित रह गया भाई देख नया रुप ।।

ऑनलाइन नजर उतारती बहना बला हो दूर
दीर्घायु हो मेरा भैय्या , स्नेह बना रहें भरपूर ।
अगले बरस ले लेगी , बहना अपना उपहार
सबसे पहले हमें खत्म करना कोरोना असुर ।।

मुहं पर लगाना मास्क , भीड़ से रहना दूर
सैनिटाइजर , साबुन से हाथ धोना भरपूर ।
हारेगा कोरोना असुर,जीतेगा भारत हमारा
तुम हो मेरे रक्षक,माँ-भाभी की आंखों के नूर ।।

गोपाल कौशल
नागदा जिला धार म.प्र.

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Mon Aug 3 , 2020
भाई बहिन का बंधन, जिसको कहते रक्षाबंधन। स्नेह प्यार से बंधा रहे, भाई बहिन का रिश्ता। इसलिए तो आता है, हर साल ये रक्षा बंधन। बहिना सबसे मिलती है, मायके में इसदिन आकर। दिल सबके खिल उठाते है, बहिना से जो मिलकर। भागम भाग की जिंदगी से, मिल नही पाता […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।