एक सत्य ये भी है

Read Time0Seconds

जन्म मरण का अब,
समीकरण बदल गया।
इंसान इंसान से दूर,
अब होता जा रहा है।
जीने की राह देखकर,
मरने की बात करने लगे।
फर्ज इंसानियत का भूलकर,
समिति अपनो तक हो गए।।

न दुआ काम आ रही है,
न प्रार्थनाएं रंग ला रही है।
पाप भरी पड़ रहे है,
पुण्यों के अनुपात में।
इसलिए सारी व्यवस्थाएं,
कर्ताधर्ता ही मिटा रहे है।
और फिर भी अपने आपको,
खुद ही मसीहा कह रहे है।।

सारी हेकड़ी एक ही,
झटके में निकल दी।
आसमान में उड़ने वाले,
अब जमी पर आ गिरे।
जो कल तक बात नही,
पूछते थे अपने से छोटा से।
आज वो ही लोग इन,
अहंकारियों के काम आ गए।।

बड़े तो बड़ो से ही,
भाग रहे है।
अपनी दोस्ती भी बस,
फोनों पर ही निभा रहे है।
सही मयानो में वो,
औपचारिकता निभा रहे है।
पर मध्यमवर्गी लोग आज भी,
अपनों का साथ निभा रहे है।।

जय जिनेन्द्र देव की
संजय जैन (मुम्बई)

0 0

matruadmin

Next Post

एक दर्द भरी दास्ता

Sat Jun 13 , 2020
दिल के जख्म कैसे दिखाए आपको। उनमें कितना दर्द है कैसे बताए आपको।। दिल पर जो बीत चुकी है बीत जाने दो। उसे दुबारा से कैसे सुनाए आपको।। तुमने सताया है पहले ही ज्यादा। फिर हम क्यो सताए आपको।। जो जख्म दिए बेवफ़ाई के तुमने उनको हर बार कैसे दिखाए […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।