नवाचार – गणेश वर्णमाला 

Read Time0Seconds
gopal
गणेश महोत्सव  तथा हिन्दी दिवस के दौरान नवोदय क्रांति भारत के म.प्र.राज्य मोटिवेटर एवं दोहावली नवाचारों के लिए विख्यात आगर मालवा के शिक्षाविद डॉ. दशरथ मसानिया द्वारा हिन्दी वर्णमाला से बनाई प्रथम पूजनीय भगवान श्री गणेश की कलाकृति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है ।डॉ  मसानिया ने अपने इस नवाचार को ‘गणेश वर्णमाला ‘ का नाम दिया है ।  खासकर शैक्षणिक संस्थानों में इस नवाचार को विशेष रूचि से देखा जा रहा है। साथ ही शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को इस नवाचारी कलाकृति से अवगत करवाया जा रहा हैं एवं इसकी फोटो प्रिंट कई  स्कूलों, बैंकों एवं आफिसों में भी लगाई जा रही हैं । डॉ. मसानिया ने बताया कि इसमें अ से गणेशजी का शरीर,एऐ से पैर,ओऔ से हाथ,अंअः से मुकुट ,उऊ से आँखें ,ऋ से तिलक तथा,इई से कान है। आ की मात्रा में स्पर्श,अंतस्थ,ऊष्म,संयुक्त तथा रूढ़ व्यंजन भिन्न भिन्न रंगो में शोभायमान है। नीचे चूहे को ॐ की  आकृति दी है।  एक दोहा पूरे चित्रांकन को स्पष्ट करता है।
“लघु दीरघ आयोगवह,चार सात दो होय।
स्पर्श अंतस्थ ऊष्मा,संयुक्त रूढ़ा  दोय।।”
डॉ. मसानिया की सभी विषयों पर दोहावली नवाचार की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। जिसमें बेटी चिरैया,बैजनाथ महिमा,गणित ज्ञान को गाइये, थाने बेटी मारी पेट में, मालवी केवातां,हिन्दी दोहावली आदि प्रमुख है।
# गोपाल कौशल
परिचय : गोपाल कौशल नागदा जिला धार (मध्यप्रदेश) में रहते हैं और रोज एक नई कविता लिखने की आदत बना रखी है।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

श्राद्ध और ब्राह्मण भोज

Fri Sep 28 , 2018
 आज कल एक नई फैशन और नई सोच समाज में तेजी से बढ़ रही है ।जहां शिक्षित वर्ग इसका अनुसरण करते नजर आ रहे हैं, वहीं पुरातन वादी सोच के व्यक्ति इसका विरोध भी कर रहे हैं। क्या आप सभी में से किसी ने कभी सोचा है कि हम साथ […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।