भव्यता और कसावट का जोड़ है ‘बाहुबली'(समीक्षा-बाहुबली)

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भव्यता,विहंगमता,अदभुत और राजनीतिक षडयंत्र का शानदार तालमेल फिल्म ‘बाहुबली’ है। महिष्मति राज्य का शासन रानी शिव गामिनी (रमैया कृष्णन) सम्भालती है। उसका बेटा भल्लाल देव(राणा डग्गुबाती)शुरू से ही कपटी ओर छली है। रानी अमरेंद्र बाहुबली(प्रभास)की चाची रानी माँ है,परन्तु वह इस बालक को वीर तथा पराक्रम को देखते हुए उसे ही राजा बनाने का निश्चय करती है। तब उसके पति(नासेर)और भल्लाल देव साजिश रचते हैं और अंत में राजफाश होता है कि,कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था। फ़िल्म के कलाकारों पर बात करें तो सारे पात्र शानदार किरदार निर्वाह कर गए। प्रभास ने तो बाहुबली के किरदार को जीवंत बना दिया,शायद भारतीय सिने प्रेमी उन्हें हमेशा बाहुबली के नाम से ही जानेंगे। राणा,रमैया, अनुष्का शेट्टी एवं सत्यराज ने भी शानदार काम किया है। प्रबल बिंदु है फ़िल्म का छायांकन जो,सन्थील कुमार का है। यह शानदार होते हुए आंखों में बस जाता है। कम्प्यूटर जनित तकनीक यानी वीएफएक्स ओर ग्राफिक्स तो आज तक भारत में हुए काम में सबसे लाजवाब है,जो कोशागिरी वेंकटेश राव ने किया है। इस फ़िल्म से हम हॉलीवुड के सामने खुद को खड़ा पाते हैं,क्योंकि
पटकथा भी शानदार है और संवाद तो सटीक है ही।
यहां फ़िल्म हॉलीवुड की ‘हरक्यूलिस’ की याद दिलाती है। फ़िल्म में प्रजा का बाहुबली के लिए प्यार और समर्पण देखते ही बनता है। इस फ़िल्म को बाहुबली का अगला भाग नहीं मानते हुए प्रीक्वल माना जाना चाहिए।
लड़ाई के दृश्य आपको सीट पर बांध देंगे और आँखें भी नहीं भींचने देंगे। इन दृश्यों को अंजाम दिया है हॉलीवुड के लड़ाई विशेषज्ञ पीटर हींन ने,जो भारतीय सिनेमा के लिए नई सौगात है।
भारत में किसी फिल्म के लिए ऐसा माहौल पहली बार देखा गया है। यह
फ़िल्म भारत मे कुल 9000 स्क्रीन्स पर तीन भाषाओ में हिन्दी,तमिल,तेलगु में प्रदर्शित हुई है और पहले दिन ही भारत में ६५ करोड़ की आय का अनुमान है तो विश्व स्तर पर १०० करोड़ पहले दिन कमाई का अनुमान है जो सच होता दिख रहा है। यदि इतनी आय हो जाती है तो यह ऐसी पहली भारतीय फिल्म होगी।
इसके लिए सिनेमाघरों में दर्शकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सिनेमाघरो में एडवांस में ही २५ करोड़ की बुकिंग हो चुकी है।
‘बाहुबली’ पहली भारतीय फिल्म है,जो २५० करोड़ के बजट की फ़िल्म है। खास बात यह है कि,इस फ़िल्म को पूरा करने के लिए प्रभास ने अपनी शादी तक मुल्तवी की है। एस.एस.राजमौली को शुक्रिया कि ऐसी कसी हुई भव्य फिल्म की सौगात दी।

                                                                        #इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।