एक नम्र निवेदन है मोदी जी तुमको।

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एक नम्र निवेदन है मोदी जी तुमको।
न आगे बढ़ाना इस लॉक डाउन को।।

बन्द पड़े हैं अब सब उद्योग धंधे,
चौपट हो गए हैं सब काम धंधे।
घर में सब लोग बन्द पड़े हुए हैं,
बोरियत के अंबार अब लगे हुए हैं
अब खोलो मोदी जी इन सबको,
एक नम्र निवेदन है मोदी जी तुमको।।

लगभग सब मज़दूर घर पहुंच चुके हैं,
अपनी रोजी रोटी अब खो चुके हैं।
चारो तरफ हाहाकार मचा हुआ है,
बेरोजगारी का अंबार लगा हुआ है।
दे दो रोजगार अब इनको सबको,
एक नम्र निवेदन है मोदी जी तुमको।।

सारी शिक्षा संस्थाएं बन्द पड़ी है,
अशिक्षा अब मुंह बाये खड़ी है।
शिक्षा के खोलो तो सब ये द्वार,
अशिक्षा का मिट जाए ये अंधकार
माँ सरस्वती कह रही है ये तुमको,
एक नम्र निवेदन है मोदी जी तुमको।।

तुमने ही दिया था नारा जान जहान का,
क्यो फूट रहा भाग्य भारत महान का।
कैसे भारत सोने की चिड़िया बन पाएगा
जब सारा भारत बेरोजगार हो जाएगा।
इन समस्याओं का निबटारा करना है तुमको,
एक नम्र निवेदन है मोदी जी तुमको।।

किया था पालन जनता ने तुम्हारे आदेशों का,
अब पालन करो जनता के आदेशों का ।
मिल जाए कुछ राहत ऐसे आदेश दीजिए,
हो जाए जन जन खुश उनका आशीर्वाद लीजिए।
सुना है तुम आगे बढ़ा रहे लॉक डाउन को,
न आगे बढ़ाना अब इस लॉक डाउन को।
एक नम्र निवेदन है मोदी जी तुमको।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।