राष्ट्रभक्ति हेतु पाठ्यक्रम बदलें।

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  सरकार चलाने का आधार भारतीय प्रशासनिक सेवा का पाठ्यक्रम है। जो अंग्रेजों के शासनकाल से चला आ रहा है। जिसके फलस्वरूप भारत और भारतीय उतना विकास नहीं कर पा रहे जितना होना चाहिए।
  यदि भारत को विकासशील बनाना है तो सर्वप्रथम भारतीय प्रशासनिक सेवा का पाठ्यक्रम बदलें। जिसके लिए मैंने कई बार आग्रह किया है, ताकि देश में बदलाव आ सके। 
  उल्लेखनीय है कि हम सब इस भूल-भुलैया में रहते हैं कि सरकार कभी क ख ग चलाता है और कभी आ ई उ या कोई अन्य राजनैतिक दल। जबकि यह अधूरा सत्य है। सम्पूर्ण सत्य यह है कि सरकार किसी की भी हो, उसे चलाते केवल भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ही हैं। उन्हीं के नेतृत्व में भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा भी कार्य करते हैं।
  उपरोक्त अर्ध और पूर्ण सत्य के बाद कड़वा सत्य यह है कि भ्रष्टाचार की मूल जड़ भी भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा ही हैं।
  चूंकि इनके पाठ्यक्रम में राष्ट्रभक्ति से अधिक सरकार भक्ति पर बल दिया गया है। क्योंकि अंग्रेजों को भारत राष्ट्र से कोई सरोकार नहीं था। उन्हें तो अपनी सरकार चलानी होती थी। इसलिए उन्हें राष्ट्र और राष्ट्रीयता से भी कुछ लेना-देना नहीं था। वे तो स्वयं लुटेरे थे और लूट में सहयोग करने वाले उच्च अधिकारियों की उन्हें अत्याधिक आवश्यकता होती थी। जिसके लिए उन्होंने प्रशासनिक सेवा के पाठ्यक्रम को ही भारत भारतीय और भारतीयता के विरुद्ध बनाया हुआ था।
  अतः यदि भारत राष्ट्र को परिवर्तित, सदृढ़, शक्तिशाली एवं आत्मनिर्भर बनाना चाहते हो तो भारतीय प्रशासनिक सेवा का पाठ्यक्रम परिवर्तित करो। सम्माननीय

इंदु भूषण बाली

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।