बच्चो व दादी में वार्तालाप

Read Time0Seconds

बच्चे बोले दादी से,
दादा बाहर क्यो नहीं जाते
हमे घुमाने क्यो नहीं जाते ।
दादी बोली,बाहर कोरो ना बैठा है
दरवाजे पर ताला लगाए बैठा है
इसलिए दादा बाहर नहीं जाते।।

बच्चे फिर दादी से बोले,
कोरोना क्या होता है,
उससे डर क्यो लगता है,
दादी बोली,
कोरोना एक महामारी है
जिससे बचना बड़ा भारी हैं

बच्चे फिर दादी से बोले,
अगर कोरोना भारी है
उसे मिलकर हम उठाएंगे
अगर वह महामारी है तो
डॉक्टर को हम बुलाएंगे
उसको इंजेक्शन लगवाएंगे

दादी बोली बच्चो की सुन भोली बाते
बच्चो को कैसे समझाए ?
भोले है ये कैसे इन्हे समझाए
सोचे सभी उपाय दादी ने
पर कोई अक्ल में न आए।
दादा झट से बोले बच्चो से
कोरोना का कोई इंजेक्शन नहीं बना है कैसे डॉक्टर उसे लगाए
जब इंजेक्शन बन जाएगा इसका
तभी तुम्हे घुमाने ले जाए।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

0 0

matruadmin

Next Post

कोरोना की जीवनशैली में तनावमुक्त कैसे रहें?

Tue May 19 , 2020
Post Views: 93

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।