प्रकृति का संदेश

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न करो तुम दोहन मेरा ,
न करो तुम दूषित मुझको |
हे ! मानव मै कोई वायरस नहीं
प्रकृति का संदेश है तुझको ||

सदियो से मनमानी करता आया ,
मनमुटाव मुझसे करता है आया |
जल और वायु जो जीवन उपयोगी ,
उनको सदा तू दूषित करता आया ||

धरा और गगन को तूने न छोड़ा ,
उच्चे उच्चे शिखरो को न छोड़ा |
उनको काट कर सुरंग बनाई ,
जीव जन्तुओ को भी न छोड़ा ||

किए तूने नये नये कारनामे ,
गगन पर किए नये फसाने |
चाँद मंगल को भी है घेरा ,
बनाना चाहता है उन पर डेरा ||

सागर का भी मंथन किन्हा,
उसमे रहने वालो का जीवन छीना |
इसमे भी बारूद की सुरंग बिछाई ,
मुश्किल हो गया उनका जीना ||

नये नये अन्वेष्ण है करता ,
अपनी कब्र खुद ही खोदता |
फिर करता प्रकृति पर दोषारोपण ,
नासमझी के काम तू है करता ||

दे रही है प्रकृति तुझको चेतावनी ,
बन्द कर मानव तू अपनी शैतानी |
वरना ये वायरस तुझको खा जायेगा,
फिर तू अपने हाथ मलता रह जायेगा ||

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।