धन्य तुम्हारा हे जन

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धन्य तुम्हारा भारतवासी ,माटी सदा ऋणी रहेगी,
संघर्ष समय में सहयोग तुम्हारा सदा गुढी रहेगी,

घर में रह कर तुमने,निज कर्तव्यों का मान रखा,
धन्य तुम्हारा हे जन,जो जन-गण-मन का मान रखा,

माना सूरज डूब रहा,अँधियारा हमपे हावी है,
लेकिन हिम्मत हो तो, एक चींटी हांथी पे भारी है,

विकसित देश हुए पीछे,हमने अपना पहचान रखा है,
धन्य तुम्हारा हे जन,जो जन-गण-मन का मान रखा है,

करतल ध्वनि में कंपन, शंकर के डमरू वाली थी,
और विषाणु में भी बल सर्वस्व मिटाने वाली थी,

सरल नही था!लड़कर हमने अपना मान रखा है,
धन्य तुम्हारा हे जन,जो जन-गण-मन का मान रखा,

कुछ ईस्वर हैं जिनका ऋणी समूचा देश रहेगा,
वो पुलिस,सिपाही,या फिर कोई उपचारक का भेष रहेगा,

नमन हमारा उनको जिनने सबका ध्यान रखा,
धन्य तुम्हारा हे जन,जो जन-गण-मन का मान रखा,

# ️दिप्तेश तिवारी

परिचयनाम:-दिप्तेश तिवारीपिता :-श्री मिथिला प्रसाद तिवारी(पुलिस ऑफिसर)माता:-श्रीमती कमला तिवारी (गृहणी)शिक्षा दीक्षा:-अध्यनरत्न 12बी ,स्कूल:-मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल रीवा परमानेंट निवास:-सतना (म.प्र)जन्म स्थल:-अरगट प्रकाशित रचनाए:-देश बनाएं,मैं पायल घुँगुरु की रस तान,हैवानियत,यारी,सहमी सी बिटिया,दोस्त,भारत की पहचान आदि।

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।