कोरोना से हम जंग जीतेगें ….

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सफल हुआ जनता कर्फ्यू

कोरोना को भगाने में यादगार
बन गया 22 मार्च रविवार ।
इतिहास रच गया जनता कर्फ्यू
जंग लडने साथ खड़ा परिवार ।।

थम-सी गई हैं जिंदगी की रफ्तार
सूनी हुई गली , सडकें , बाजार ।
देश-विदेश,गांव-शहर में चहुंओर
कोरोना ने मचाया है हाहाकार ।।

पांच बजे सब लिए खडें थे
शंख,घंटी और हाथों में थाली ।
कोरोना गो , कोरोना गो बोल
एकसाथ खडें हो बजाई ताली ।।

हमने एक वक्त पर एक साथ
खड़े हो दिया उनको सम्मान ।
जो अपना सबकुछ भूलकर
हमारी रक्षार्थ संभालें हुए मैदान ।।

कोरोना को भगाने के लिए
देशवासियों ने एकता दिखाई ।
जाति धर्म से बड़ा देश धर्म हैं
यह बात जगत को बतलाई ।।

दिन भर हाथ को साफ करो
गले मिलने को माफ करो ।
बस दूर से ही साथ जोडें
मेलजोल को अभी हॉफ करो ।।

घर पर रहना करनाअपना काम
भीडभाड़ से बचना ही एतराम ।
थोडी सर्तकता , सावधानी ही
लगा सकती हैं इस पर विराम ।।

#गोपाल कौशल
नागदा जिला धार मध्यप्रदेश

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सफाई योग

Tue Mar 24 , 2020
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।