भ्रष्टाचारी की दुखद मृत्यु पर शोक : एक प्रश्नचिन्ह (संस्मरण)

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   वह शराब पीकर बीच सड़क में गिरा हुआ था। राहगीर उसे घृणा की दृष्टि से देख कर आगे बढ़ रहे थे। उसकी फटी व टूटी-फूटी आवाज़ आ रही थी। वह कह रहा था कि ईश्वर ने उसे खज़ाना दिया हुआ है। इसलिए वह आनंद ले रहा है। 
   वह सरकारी विभाग में कार्यरत था और अपने वेतन से अधिक घूसखोरी से कमाई करता था। इसलिए वह शराब, कबाब व शबाब का आदी हो चुका था। 
   उसके बच्चे भी आवारगी करते थे। जिसके कारण अक्सर पुलिस के शिकंजे में फंस जाते थे। 
    एक दिन समाचार आया कि शराब के नशे में गाड़ी चलाते हुए उसकी दुर्घटना के कारण मृत्यु हो गई है।
   उसकी दुखद मृत्यु पर शोक प्रकट करने वाले घुटी आवाज़ में कानाफूसी कर रहे थे कि यह भी अन्य भ्रष्टाचारियों की भांति अपनी कमाई भी नहीं खा सका। चर्चाओं में प्रश्न था कि किसी ऐसे भ्रष्टाचारी का नाम बताओ जिसने अपना वेतन व पेंशन 'ईमानदारों' की भांति खाई हो? 

निष्कर्ष = भ्रष्टाचारी अल्प आयु होते हैं।
राय = भ्रष्टाचारियो ईश्वर से डरो।

इन्दु भूषण बाली
पत्रकार, समाजसेवक, एसएसबी विभाग का पीड़ित पूर्व कर्मचारी, लेखक हिंदी डोगरी व अंग्रेजी एवं भारत के राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी तहसील ज्यौड़ियां जिला जम्मू जम्मू कश्मीर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।