सीधी-सच्ची बात

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काँइं – काँइं करती हुई लँगड़ी कुतिया अपना टूटा पैर खींचती हुई बाहर चली गई | काकी ने बड़ी जोर से बेचारी कुतिया की पीठ पर डडोका (लट्ठ) जो मारा था |

काकी की ये हरकत आर्यन को कतई अच्छी नहीं लगी | वो रुआँसा सा होकर काकी से बोला -‘ काकी तुम बुरी हो, तुमने उस बेचारी कुतिया में डंडा क्यों मारा ? अगर तुम उसे रोटी का एक टुकड़ा भी नहीं डाल सकती तो कम से कम डंडा तो मत मारो | बेचारी का एक पैर टूटा है |’

‘अरे ! वो जाती कहाँ है ? कितनी बार भगाया, बार-बार आ जाता है |’ काकी झल्लाती हुई बोली |

‘और वो… तिलक वाला ! जो आड़े-तिरछे तिलक लगाकर रोज-रोज आता है | उसे तो तुम थाली भरकर आटा दे देती हो | देखा नहीं कितना मोटा-तगड़ा पट्ठा जवान है |’ आर्यन काकी पर गुस्सा होता हुआ बोला |

‘अरे बेटा ! वे ब्राह्मण देवता हैं, अगर उन्हें दान-दक्षिणा नहीं देंगे तो वे श्राप दे देंगे | समझे…!’ काकी आर्यन को समझाते हुए प्यार से उसके सिर पर हाथ फैरते हुए बोली |

‘पर… काकी, बेचारी उस लँगडी कुतिया का तो कोई घर नहीं, कोई खेत नहीं, उसके पास खाने को भी कुछ नहीं ऊपर से पैर भी टूटा और भूल से किसी के घर – आँगन चली जाये तो मार खाती है, फिर भी किसी को श्राप नहीं देती | कितनी अच्छी है न वो’…. आर्यन एक सांस में सीधी-सच्ची बात कह गया |

आर्यन के इस भोलेपन पर लट्टू होते हुए काकी ने उसे अपने सीने से चिपका लिया |

#मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

परिचय : मुकेश कुमार ऋषि वर्मा का जन्म-५ अगस्त १९९३ को हुआ हैl आपकी शिक्षा-एम.ए. हैl आपका निवास उत्तर प्रदेश के गाँव रिहावली (डाक तारौली गुर्जर-फतेहाबाद)में हैl प्रकाशन में `आजादी को खोना ना` और `संघर्ष पथ`(काव्य संग्रह) हैंl लेखन,अभिनय, पत्रकारिता तथा चित्रकारी में आपकी बहुत रूचि हैl आप सदस्य और पदाधिकारी के रूप में मीडिया सहित कई महासंघ और दल तथा साहित्य की स्थानीय अकादमी से भी जुड़े हुए हैं तो मुंबई में फिल्मस एण्ड टेलीविजन संस्थान में साझेदार भी हैंl ऐसे ही ऋषि वैदिक साहित्य पुस्तकालय का संचालन भी करते हैंl आपकी आजीविका का साधन कृषि और अन्य हैl

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।