हिन्दी दिवस पर लेखन प्रतियोगिता आयोजित

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महेश्वर। मातृभाषा उन्नयन संस्थान एवं निमाड़ लोक-रंग संस्था द्वारा 77वॉं हिन्दी दिवस उत्सव-2026 के उपलक्ष्य में हिन्दी लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 20 प्रतिभागियों ने अखिल भारतीय स्तर पर भाग लिया, जिसमें से प्रथम स्थान पर डॉ. कुसुम रानी नैथानी (देहरादून, उत्तराखंड) का उनकी लघुकथा ‘प्रेज़ेंटेशन’, द्वितीय स्थान ऋचा दिनेश तिवारी (इंदौर, मध्य प्रदेश) को उनकी रचना ‘मेरी मातृभाषा हिन्दी’ तथा तृतीय स्थान पर प्रभा पारीक (भरूच, गुजरात) को उनकी रचना ‘है भारत की पहचान यही’ के लिए पुरस्कृत किया गया।
निमाड़ लोक-रंग संस्था अध्यक्ष व युवा रचनाकार मनीष कुमार पाटीदार व सचिव ऋषिकेश ओसवाल ने प्रतियोगिता सम्पन्न करवाई।

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने हिन्दी आंदोलन व हिन्दी में हस्ताक्षर अभियान पर प्रकाश डालते हुए सभी से आग्रह किया कि अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करें।

प्रतियोगिता में देश के अलग-अलग राज्य व शहर से प्रतिभागियों ने भाग लिया। इन प्रतिभागियों में नरेंद्र सिंह परिहार (नागपुर), सुनील गज्जाणी (बीकानेर), आरव उपाध्याय (हाथरस, उत्तर प्रदेश), डॉ. विजयानन्द विजय (गाज़ियाबाद), सुषमा चौरे (इंदौर), गोविंद पाल (भिलाई, छत्तीसगढ़), डॉ. नवीन कुमार भट्ट नीर (मझगवां, उमरिया मध्यप्रदेश), संजय उपाध्याय (सुदामा नगर इन्दौर), उषा दुबे (हाटपीपल्या जिला देवास), आशना सोनी (जोधपुर राजस्थान), धीरेंद्र कुमार जोशी (महू, इंदौर), डॉ. राकेश चक्र (शिवपुरी, मुरादाबाद), अन्जना मनोज गर्ग (कोटा, राजस्थान), डॉ. संध्या तिवारी (पीलीभीत, उत्तर प्रदेश), कुन्दन पाटिल देवास (नयापुरा, देवास), डॉ. रत्नेश गुप्ता (ग्वालियर), अनिता चंद (हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखंड) आदि ने सहभाग किया।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।