हिन्दी दिवस पर लघुकथा मन्थन 2026 का आयोजन रविवार को

लघुकथा पर गंभीर विमर्श के साथ प्रदेशभर से आए लघुकथाकार करेंगे लघुकथा पाठ

इन्दौर। हिन्दी भाषा और उसकी विधाओं के प्रचार के लिए प्रतिबद्ध मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा हिन्दी महोत्सव 2026 के अन्तर्गत रविवार को प्रीतमलाल दुआ सभागार में दोपहर 1 बजे से लघुकथा मन्थन 2026 आयोजित किया जा रहा है।

हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित मन्थन तीन सत्रों में सम्पन्न होगा, जिसमें विमर्श, सम्मान, लघुकथा पाठ एवं लोकार्पण होगा।

आयोजक संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने बताया कि ‘लघुकथा के युवाओं के बीच प्रभाव और प्रचार के उद्देश्य से लघुकथा मन्थन इन्दौर में आयोजित किया जा रहा है। आयोजन के उद्घाटन सत्र में ‘समकालीन लघुकथा और जेन ज़ी का सहभाग’ विषय विद्वान विमर्श करेंगे। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम, अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार सूर्यकान्त नागर व विशेष आतिथ्य भोपाल से कान्ता रॉय रहेंगी। इसी सत्र में डॉ. पुरुषोत्तम दुबे व कान्ति शुक्ला को जीवन गौरव सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। द्वितीय सत्र में चयनित लघुकथाकार लघुकथा पाठ करेंगे। तृतीय सत्र में लघुकथाकारों का सम्मान व लोकार्पण होगा, जिसके मुख्य अतिथि सांसद शंकर लालवानी रहेंगे व अध्यक्षता प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविंद तिवारी व विशेष अतिथि भोपाल के वरिष्ठ लघुकथाकार घनश्याम मैथिल रहेंगे। सत्रों का संचालन अंशुल व्यास करेंगे।’

लघुकथा जैसी विधा पर एक विमर्श और मन्थन की दरकार रही है, उसी तारतम्य में यह महनीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें संस्मय प्रकाशन, पंचौली रेस्टोरेंट, मातृभाषा डॉट कॉम व हिंदी आंदोलन का सहयोग रहेगा। इसके साथ संस्थान इस विमर्श को स्थापित कर लघुकथा विधा एवं हिन्दी के प्रचार के लिए एक सकारात्मक हल प्रदान करेगा, जो निकट भविष्य में साहित्य व लघुकथा की दृष्टि से कारगर होगा। यह आयोजन सभी के लिए खुला है।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।