अमेरिका में अलग-थलग पड़े ट्रंप,पर कतरने की तैयारी तेज़।

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विश्व की राजनीति में एक ऐसी दर्दनाक घटना जिसने सम्पूर्ण विश्व को फिर से एक बार भीषण आग में ढ़केलने का प्रयास किया। जिससे कि पूरे विश्व में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। विश्व के सभी देश इस कदम पूरी तरह से भयभीत हैं। पूरी दुनिया एक बार फिर से दहल उठी। ऐसा कृत्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा किया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ट्रंप ने ऐसा क्यों किया…? विश्व की राजनीति के जानकारों की माने तो यह पूरा समीकरण राजनीति से प्रेरित है। क्योंकि अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं। इस स्थिति में राजनीतिक समीकरण को साधने के लिये ट्रंप ने ऐसा घातक कदम उठाया कि वह पुनः सत्ता में वापसी कर सकें। ऐसा करने पर ट्रंप के पीछे मुख्य कारण यह था कि अमेरिका में ट्रंप की विदेश नीति का घोर विरोध काफी समय हो रहा है जोकि अब शीर्ष पर पहुँच चुका है। विरोध अपनी सभी सीमाओं को पार करता हुआ ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की स्थिति में आ पहुँचा है। इससे घबराए हुए ट्रंप ने जल्दबाजी में यह कदम उठाया कि किसी तरह से डायमेज क्न्ट्रोल किया जा सके और सत्ता की कुर्सी पर बने रहा जा सके, साथ ही कुर्सी पर बने रहकर फिर दुबारा सत्ता में वापस आया जा सके। यह घोर पाप ट्रंप ने अपनी सत्ता मोह में किया। मगर ट्रंप को यह नही पता था कि उनके द्वारा बुना गया हुआ जाल उनके लिए ही सबसे मुसीबत बनकर सामने आ खड़ा होगा। ट्रंप को इस बात का आभास भी नहीं था कि खुद के अपने देश में वह अलग-थलग पड़ जाएंगे और उनके खिलाफ ही उनका देश गोलबंद होने लगेगा। ट्रंप ने जो चाल चली वह चाल ट्रंप के लिए उल्टी पड़ती हुई दिखाई देने लगी। अमेरिकी कांग्रेस और विरोधी रिपब्लिकन पूरी तरह से ट्रंप के विरोध में उतर आए हैं। और ट्रंप को सीमित करने की कवायद तेज हो गई है। यदि शब्दों को बदलकर कहा जाए तो शायद गलत नहीं होगा कि ट्रंप ने जो दाँव अपने देश की जनता को गुमराह करने के लिए चला था कि किसी तरह से अमेरिका की जनता भ्रमित हो जाए और विरोधियों का मुँह बंद हो जाए जिससे कि सत्ता में बने रहें। ट्रंप के द्वारा गढ़ी गई यह योजना पूरी तरह से उलटी पड़ गई। ट्रंप का यह दाँव इतना उलटा पड़ गया कि खुद अमेरिकन कांग्रेस सीधे-सीधे ट्रंप के विरोध में उतर आई और ट्रंप के पर कतरने की बात तक कह दी। अतः ट्रंप अब खुद अपने बुने हुए जाल में फंस गए हैं। जिससे कि पूरे अमेरिका में ट्रंप की बड़ी किरकिरी शुरू हो गई। एक अमेरिकी राष्ट्रपति का खुद उसके देश में उसका राजनीतिक कद छोटा करने वाला कदम एक राष्ट्रपति के लिए बहुत ही अपमान की बात है।
ट्रंप के खिलाफ उठ रहे स्वर की असल वजह यह है कि कासिम सुलेमानी के खिलाफ ड्रोन अटैक की जानकारी अमेरिकी संसद तक को नहीं दी गई। अमेरिकी संसद की स्पीकर और डेमोक्रेट सांसद नैंसी पेलोसी ट्रंप के खिलाफ खुलकर बात रख रही हैं और उन्होंने ट्रंप का पवार सीमित करने का प्रस्ताव तक संसद में रख दिया। जिससे कि ट्रंप अब चारो खाने चित हो गए। ट्रंप का यह कुकृत्य ट्रंप पर पूरी तरह से उल्टा पड़ गया। अमेरिका ने ईरानी सेना के जनरल कासिम सुलेमानी को एयरस्ट्राइक में मारकर न सिर्फ सबको चौंका दिया बल्कि पूरी दुनिया में हलचल भी पैदा कर दी ईरान जहां अपने जनरल की मौत का इंतकाम लेने पर उतारू हो गया वहीं बाकी देश भी डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के इस एक्शन की आलोचना करने लगे। इतना ही नहीं, ट्रंप को खुद अमेरिका के अंदर आलोचना और भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जिसका दृश्य अमेरिकी संसद में खुलकर ट्रंप के विरोध में खड़ा दिखाई दे रहा है। जिससे कि ट्रंप पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गए हैं। साथ ही ट्रंप कद छोटा होने के साथ-साथ कुर्सी के जाने का भी खतरा मंडराने लगा है।
नैंसी पेलोसी ने यूएस कांग्रेस के सभी सांसदों को लिखित रूप से ट्रंप के खिलाफ आदेश जारी कर दिया है। नैंसी पोलिसी के द्वारा रखे गए प्रस्ताव में ईरान के खिलाफ अमेरिकी राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई को सीमित करने का प्रस्ताव रखा है। जिसमें साफ और स्पष्ट रूप से ट्रंप के पर कतरने की बात कही गई है। अपने इस प्रस्ताव के पीछे नैंसी ने कहा कि ईरान के साथ तनाव पैदा होने से अमेरिकी सैनिक और नागरिक दोनों पर बड़ा खतरा पैदा हो गया। अतः पूरी समस्या का आधार ट्रंप हैं। जिनके द्वारा देश को भारी नुकसान हुआ साथ ही अमेरिका पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ जाएगा जिससे कि निकट भविष्य में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा साथ ही अमेरिकी नागरिकों को भी पूरे विश्व में जान-माल के खतरे से भी गुजरना पड़ेगा। अतः ट्रंप ने बैठे बैठाए अमेरिका के लिए एक बहुत ही घातक समस्या उत्पन्न कर दी। जिससे कि अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपने देश एवं अपने नागरिकों की हित एवं सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएं। अब हम ईरान के संदर्भ में अमेरिकी राष्ट्रपति की फैसले लेने की क्षमता को सीमित करने के लिए सांसद में वोटिंग करने जा रहे हैं।
अपने द्वारा बुने हुए जाल में फंसने के बाद ट्रंप सीधे बैक फुट पर आ गए और अब ट्रंप के शब्द तेजी के साथ बदलने लगे। जहाँ ट्रंप अभी तक अपनी ताकत का बखान करते हुए नहीं थकते थे कि हम दुनिया कि सबसे बड़ी ताकत हैं। क्योंकि, ट्रंप अपनी ताकत की खुली धमकी सारी दुनिया को दे रहे थे। मानो ईरान के बहाने ट्रंप पूरे विश्व को डराने का प्रयास कर रहे थे। खुद अमेरिका में अलग-थलग पड़ने के बाद ट्रंप को अब अपने पर कतरे जाने के भय सीधे सताने लगा है। इसीलिए ट्रंप ने अपने सुर बदल दिए और अब ताकत की धमकी देने से इतर खुद शांति की अपील करने लगे। इसके बाद ट्रंप ने नए शब्दों का चुनाव करते हुए कहा कि हम विश्व में तेल और गैस के सबसे बड़े उत्पाकदक हैं हम तेल के लिए ईरान या उसके आसपास के देशों पर निर्भर नहीं हैं अब हम पहले की तुलना में मजबूत हो गए हैं। अतः हम ईरान से अपील करते हैं कि वह शान्ति बनाए रखे। और हम शान्ति के पक्षधर हैं। ट्रंप का इतनी तेजी के साथ बैकफुट पर आ जाना यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ट्रंप कुर्सी के लिए सब कुछ कर सकते हैं। क्योंकि, ट्रंप ने कुर्सी के लिए ही ईरानी जनरल की हत्या तक कर दी कि किसी तरह से कुर्सी पर बने रहा जाए। लेकिन जब ट्रंप का यह दाँव उलटा पड़ गया और खुद अमेरिका में ही उनका कद छोटा करने की कवायद तेज हो गई। तो ट्रंप ने तेजी के साथ नया पैंतरा चला और अब शांति के दूत बनकर सामने आ गए। जोकि अभी तक पूरी दुनिया के सामने ताकत की खुली धमकी दे रहे थे। ट्रंप ने तेजी के साथ अपने को ईरान का हितैषी भी बता डाला ट्रंप ने कहा कि आईएसआईएस के लीडर बगदादी का खात्मा किया गया जिसमें हमारी सबसे बड़ी भूमिका थी क्योंकि बगदादी आईएसआईएस को दोबारा खड़ा करने की कोशिश में लगा था। लेकिन दुनिया जानती है कि हमने उसे रोका। ऐसा हमने जो किया वह ईरान के लिए ही किया क्योंकि आईएसआईएस ईरान का सबसे बड़ा दुश्मन था हमने उसे खत्म किया। आईएसआईएस का खात्मा ईरान के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद रहा। हमारा यह कदम ईरान के लिए सबसे बड़ा फायदेमंद रहा। हमने यह बड़ा कदम ईरान के फायदे के लिए ही उठाया।
ज्ञात हो कि जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया। बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर ताबड़तोड़ रॉकेट दागे गए। जानकारी के मुताबिक ईरान के साथ बढ़ती तल्खी के मामले पर अमेरिका अब भारत से संपर्क में लगातार बना हुआ है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने अलग अलग तौर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रिसेप तैय्यप एडरेऑन के साथ फोन पर मध्य-पूर्व क्षेत्र की स्थिति पर बात की तीनों नेताओं ने मध्य-पूर्व क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताई और विभिन्न पक्षों से संयम से काम लेने की अपील की। सीरिया के विदेश मंत्रालय ने वक्तव्य जारी कर इराक और ईरान को संवेदना दी और अमेरिका की घोर निंदा की वक्तव्य में कहा गया है कि इराक की अस्थिरता का कारण अमेरिका है। इसके साथ-साथ कतर और लेबनान के विदेश मंत्रालय ने भी वक्तव्य जारी कर विभिन्न पक्षों से संयम से काम लेने की अपील की, ताकि मध्य-पूर्व क्षेत्र की स्थिति न बिगड़े।
ट्रंप ने जिस प्रकार का अनैतिक कदम उठाया उससे पूरे दुनिया में भय का माहौल बन गया। लेकिन ट्रंप ने ऐसा कदम जिस उद्देश्य से उठाया कि किसी तरह से राजनीति के केंद्र में रहकर सत्ता की कुर्सी पर बने रहा जाए। और महाभियोग जैसे भारी विरोध से निपटा जाए साथ ही दुबारा राष्ट्रपति की कुर्सी पर विराजमान हो सकें। लेकिन ट्रंप का यह दाँव पूरी तरह से उल्टा पड़ गया और अमेरिकी कांग्रेस ने खुलकर ट्रंप की नीति का विरोध किया और ट्रंप का कद छोटा करते हुए पर कतरने की रूप रेखा पर कार्य आरंभ कर दिया। जिससे कि ट्रंप के कद को छोटा करने की तैयारी तेज हो गई। जिससे कि ट्रंप तेजी के साथ बैकफुट पर आ गए और ट्रंप ने अब अपने सुरों को तेजी के साथ बदलना शूरू कर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति विश्लेषक।
(सज्जाद हैदर)

                               

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।