देह की दुर्गति

Read Time1Second

devendr soni
चार भाई बहनों में बड़ी , नाजों से पली राजो का बचपन हंसते खेलते बीत गया था ।
कैशोर्य की अल्हड़ता और प्रस्फुटित हो रही मादकता ने उसके स्वभाव में चंचलता और स्वच्छन्दता को बढ़ा दिया था।
गांव में उसके निखरते रूप और यौवन की चर्चा होने लगी थी। मनचले युवकों की टोली राजो को आते – जाते हल्के -फुलके बेसुरे राग से उसका सौन्दर्य बोध कराते जिसे सुनकर वह और अधिक खिल उठती ।
पहले तो राजो ने इन पर कोई ध्यान नही दिया किन्तु धीरे – धीरे वह प्रशंसा सुनने के मौके तलाशने लगी । परिणाम यह हुआ कि वह अनचाहे आरोपों से घिर गई और पढ़ाई छूट गई । बड़े घर की बेटी थी समय रहते बदनामी के डर से बचने के लिए पिता ने आनन – फानन में उसकी शादी कर दी ।
राजो अपने विवाह से खुश थी । सम्पन्न ससुराल में उसे सब कुछ मिला पर शराबी पति से वह सन्तुष्ट नही थी । फलतः जल्दी ही ऊब गई । बार – बार रूठ कर मायके चली जाना , राजो की फितरत बन गई । अतृप्त मन की कसक ने उसे विचलित कर दिया । उसकी बढ़ती स्वच्छन्दता और लगते आरोपों के बीच वह दो बच्चों की माँ भी बन गई पर उसके स्वभाव में कोई परिवर्तन नही आया ।
समय बीतता गया और एक दिन अत्यधिक शराब पीने की वजह से संसार में अपने बच्चों के साथ वह अकेली रह गई । ससुराल वालों ने उस पर बदचलनी और पति की असमय मौत का आरोप लगाकर पल्ला झाड़ लिया ।
वह मायके आ गई पर मायके में भी कब तक रहती । उसके मनचले स्वभाव से सब परेशान थे।       इतना कुछ बीत जाने के बाद भी राजो के स्वभाव में कोई परिवर्तन नही आया तो भाइयों ने मिलकर उसे पास ही के शहर में नोकरी लगवा दी ।
अब राजो अपने बच्चों के साथ शहर में एक किराए के मकान में रहने लगी। अकेलेपन का उसने जमकर फायदा उठाया और अनेक व्यक्तियों से उसके मधुर सम्बंध बन गए। पैसे की चाहत में वह लोगों को ब्लैक मेल करने लगी । उसकी बढ़ती ज्यादतियों से तंग आकर किसी ने उसकी हत्या कर दी ।
कई दिन बाद घने जंगल में उसका मृत कंकाल पुलिस ने बरामद किया । जिस देह के बल पर राजो इतराती थी वह देह हड्डियों के ढांचे में परिवर्तित हो चुकी थी । बमुश्किल राजो की शिनाख्त हो सकी ।
क्रिया कर्म के बाद लोग बतिया रहे थे – लगते आरोपों से यदि राजो समय रहते सम्हल जाती तो आज उसकी देह की यूँ दुर्गति न हुई होती ।

 #देवेंन्द्र सोनी, इटारसी।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

शेर ए पंजाब उधमसिंह 

Tue Jun 12 , 2018
जलियांवाला बाग कांड ने कर दिया था उद्देलित तुम्हें । डायर को  मार  गिराने की खाई थी  कसम वीर तुमने ।। अंग्रेजों की नींद हराम कर दी थी,उधमसिंह जी तुमने । लंदन जाकर मार  गिराया डायर  को  शूरवीर  तुमने ।। कर्ज न उतार  पाएंगे  हम ऐसे  बलिदानी  वीरों  का । […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।