जाने-अनजाने ही जुड़ गई

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bharat malhotra
जाने-अनजाने ही जुड़ गई
तुमसे मेरी हर अभिलाषा
तुम्हें समर्पित मेरा जीवन
अर्पण तुमको ही हर आशा
मन-मंदिर में जो स्थापित है
रत्न-जड़ित वो मूर्ति हो
मेरे बहुरंगी स्वप्नों की
तुम ही इच्छित पूर्ति हो
जब भी घोर निराशा छाए
देती तुम्हीं मुझे दिलासा
तुम्हें समर्पित मेरा जीवन
अर्पण तुमको ही हर आशा
अस्तित्व मेरा सुवासित जिससे
तुम हो वो दिव्य प्राजक्ता
जल की शीतलता हो तुम ही
तुम्हीं अनल की हो दाहक्ता
मेरे वृहद् प्रेम-ग्रंथ की
संक्षिप्त, तार्किक तुम मीमांसा
तुम्हें समर्पित मेरा जीवन
अर्पण तुमको ही हर आशा
तेरे शब्दालंकारों से
रचता रहूँ मैं गीत-छंद
तेरे सहचर्य से रमणी
मिट गए सारे द्विधा-द्वंद
सिमट गई तुझमें ही जैसे
संबंधों की हर परिभाषा
तुम्हें समर्पित मेरा जीवन
अर्पण तुमको ही हर आशा
भरत मल्होत्रा।
परिचय :- 
नाम- भरत मल्होत्रा 
मुंबई(महाराष्ट्र)
शैक्षणिक योग्यता – स्नातक 
वर्तमान व्यवसाय – व्यवसायी 
साहित्यिक उपलब्धियां – देश व विदेश(कनाडा) के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों , व पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित
सम्मान – ग्वालियर साहित्य कला परिषद् द्वारा “दीपशिखा सम्मान”, “शब्द कलश सम्मान”, “काव्य साहित्य सरताज”, “संपादक शिरोमणि”  
झांसी से प्रकाशित “जय विजय” पत्रिका द्वारा ” उत्कृष्ट साहितय सेवा रचनाकार” सम्मान एव 
दिल्ली के भाषा सहोदरी द्वारा सम्मानित, दिल्ली के कवि हम-तुम टीम द्वारा ” शब्द अनुराग सम्मान” व ” शब्द गंगा सम्मान” द्वारा सम्मानित  
प्रकाशित पुस्तकें- सहोदरी सोपान 
                         दीपशिखा 
                         शब्दकलश 
                         शब्द अनुराग 
                         शब्द गंगा 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।