बाल पणै ब्याह

Read Time4Seconds

बाल पणै शादी करी, भटक गया मन मीत
पढ़बो लिखबो छूटगो, आय लपेटै रीत।।

बेगा होगा टाबराँ, सेहत गई पताल़।
आय जवानी पैल हीं, हुयो जीव जंजाल़।।
मात पिता न्यारा करै, खाओ कव्है कमाय।
भूत भविश की सोचताँ, बर्तमान भी जाय।।
दौरो होगो जीवणो, भूल गया सब गीत।
बाल पणै शादी करी, भटक गया मन मीत।।

भैण भुवा का लाड़ सब, गयै कुआ कै पींद।
चार दिनाँ को चानणों , बणै जिँदाड़ै बींद।।
म्हे डूब्या सो भौत छै, मान मँजूरी खाय।
अब सरकारी रोक वै,रोक समाज लगाय।।
रीत रीत मैं लुट गई, होती जे मन प्रीत।
बाल पणै शादी हुई, भटक गया मन मीत।।

बाल ब्याह अभिशाप छै,करो समाजी गाड़।
समय पाय शादी करो, बाल पणै नहिँ लाड़।।
सत फेरा,सातूँ वचन, कर ल्यो सत संकल्प।
बाल ब्याह नै टाल़णो,कर ल्यो काया कल्प।।
रीत पुराणी भूलियो, देख जमाना गीत।
बाल पणै शादी हुई, भटक गया मन मीत।।

नाम–बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः 10

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

भावना या दिखावा

Thu Oct 10 , 2019
गये थे आज मंडी में लेने को कुछ फूल। वहां जाकर देखा तो एक दम दंग रह गए। की जो फूल लेने को हम वहां गए है। वो सारे फूल पहले से पैरों में पड़े हुए है। अब में कैसे उन्हें लू और प्रभु के चरणों मे कैसे चढ़ाऊँ।। सही […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।