किस्मत के खेल निराले

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किस्मत के खेल निराले ,
अमृत कहीं विष के प्याले , कोई सोये महलों में ,
कई तूफानों नें पाले .

कोई धोये झूठे बर्तन ,
पाप कोई कराए जबरन .
किसी की पांव तले गर्दन, किसी के मुँह पर बांधे ताले.
किस्मत तेरे खेल निराले.

स्कूल जाए कोई टांगे बस्ता, कबाड़ चुगे कोई रस्ता- रस्ता. कहीं पे जीवन इतना सस्ता, बहता फिर भ्रूण नाले -नाले .
किस्मत तेरे खेल निराले.

गधा बना कोई काज करे ,
कोई घर में बैठा राज करें. हाजमा खा कोई हाज करें, किसी के घर में नहीं निवाले .
“मीन” किस्मत खेल निराले.

हे ईश्वर तूने कर दिए चाले, आस्तीन में जो साँप हैं पाले. जिन कर्म लिखण म किए घोटाले .
किये गरीबी नाम हवाले, किस्मत तेरे खेल निराले .
स्वरचित मौलिक रचना
#डॉ. मीना कुमारी सोलंकी

नीमलीआली, हरियाणा

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।