पुस्तक विमोचन व विराट कवि सम्मेलन तमनार में सम्पन्न

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दर्दोगम की बस्ती नामक पुस्तक हृदय को उद्वेलित करने वाली है – जयशंकर
रायगढ़ |

औद्योगिक व वनांचल तहसील तमनार के नवदुर्गा समिति बरभांठा द्वारा पुस्तक विमोचन एवं विराट कवि सम्मेलन का सफल आयोजन गत् दिवसांक 05 अक्टूबर को किया गया ।
उक्त आयोजन के मुख्य अतिथि रायगढ़ के ख्यातिलब्ध साहित्यकार पं. शिवकुमार पाण्डेय जी , कार्यक्रम अध्यक्ष गजलकार शुकदेव पटनायक जी , विशिष्ट अतिथि प्रो. के. के. तिवारी जी व कवि कमल बहिदार जी थे ।
कार्यक्रम के प्रथम चरण में माँ ज्ञानदात्री महासरस्वती जी के छायाचित्र पर माल्यार्पण व समक्ष दीप , धुप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया ।
तत्पश्चात स्वागत के क्रम में आयोजक समिति के सक्रिय सदस्यों ने सभी साहित्यकारों को तिलक लगाकर व श्रीफल प्रदान करके स्वागत – सम्मान किये ।

स्वागत पश्चात् अंचल के प्रतिष्ठित गजलकार जयशंकर प्रसाद डनसेना जी द्वारा सृजित गजल “दर्दोगम की बस्ती” नामक पुस्तक का विमोचन अतिथियों व आमंत्रित कवियों के हाथों से हुआ ।
अपने उद्बोधन में जयशंकर जी ने कहा कि – “मैं , जल – जंगल व जमीन को लक्ष्य बनाकर जो गजल सृजन किया हूँ । वह , प्रत्येक आंचलिक के हृदय को उद्वेलित करने वाली है । समस्त रचनाएँ मात्र कोरी कल्पना नहीं वरन् यथार्थ के धरातल पर सृजित की गई गजल है । आशा है , पाठक जगत स्वागत करेंगे ।।

तृतीय चरण में आमंत्रित रचनाकारों द्वारा अपने – अपने प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया गया ।
जिसमें पं. शिवकुमार पाण्डेय , प्रो. के. के. तिवारी , कमल बहिदार , राघवेन्द्र सिंह रुहेल , डॉ. दिलीप गुप्ता , शुकदेव पटनायक , रूखमणी राजपूत , स्नेहलता सिंह ‘स्नेह’ , पुष्पलता पटनायक , संतोष पैंकरा , उग्रसेन स्वर्णकार , तेजराम चौहान , जय शंकर प्रसाद डनसेना , बालकवि प्रमोद सोनवानी ‘पुष्प’ , सिमरन साहू , कन्हैया पड़िहारी , मिमिक्री कलाकार सेतकुमार गुप्ता आदि प्रमुख हैं ।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोजक समिति द्वारा सभी प्रतिभागी रचनाकारों को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया ।
कुशल मंच संचालन घरघोड़ा से पधारे प्रतिष्ठित कवि डॉ. दिलीप गुप्ता जी ने किया ।
आयोजन को सफल बनाने में रूपचन्द्र गुप्ता , परमानंद पटनायक , डॉ. मित्रभान गुप्ता , अरविन्द गुप्ता , प्रमोद साव , गोपाल गुप्ता , प्रदीप नायक आदि की भूमिका सराहनीय रही ।
उक्त सफल कवि सम्मेलन अंचल में चर्चा का विषय है ।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।