
बहुत कुछ बदलाव की जरुरत है अब
अन्याय से टकराव की जरुरत है अब।
कब तक हाथ जोडे सिर झुकाये रहोगे
गुलामगिरी से उठाव की जरुरत है अब।
जो कमजोर है उसी को सताती है दुनिया
तुमको भी तो प्रभाव की जरुरत है अब।
ऐसे ही आक्रोश को पनपने दो सिने मे
धधकती हुई अलाव की जरुरत है अब।
टुकडो मे बटे हो इसलिये टुकडे हो रहे है
आपस मे तुम्हे लगाव की जरुरत है अब।
कब तक मातम करोगे अपने हाल पर
जालिमों से टकराव की जरुरत है अब।
#संजय अश्क बालाघाटी

