आजादी

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आजादी का मतलब केवल झंडा फहराना नहीं होता,,
आजादी का मतलब केवल राष्ट्रगान गाना नहीं होता,,
पुरखों ने बलिदान दिया तब जाकर आजादी पाई,,
ये दिन पाने की खातिर जाने कितने वीरों ने जान गवाई,,
वीर शहीदों को श्रद्धांजलि केवल फूल चढ़ाना नहीं होता,,
आजादी का मतलब केवल झंडा फहराना नहीं होता,,

आजादी का उत्सव केवल एक दिन का गुणगान नहीं,,
वह भारतवासी ही क्या जिसे फौजी का सम्मान नहीं,,
खेत में अन्न उगा कर के पूरे देश का पेट भरे,,
है सच्चा सपूत वही किसान जिसे देश कहे,,
फौजी और किसान बिना कोई देश सितारा नहीं होता,,
आजादी का मतलब केवल झंडा फहराना नहीं होता,,

आजादी की खुशबू से हमें भारत को महकाना है,,
वीर शहीदों की गाथा को घर-घर तक पहुंचाना है,,
महापुरुषों की तस्वीरों को अब हर घर में दिखला दो,,
और बेटी की इज्जत कैसे हो हर बेटे को सिखला दो,,
बेटी के सम्मान बिना देश का जयकारा नहीं होता,,
आजादी का मतलब केवल झंडा फहराना नहीं होता,,

सचिन राणा हीरो

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।