ख़त

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krishn kashyap
ये जीवन मेरा  कोरा  कागज़,
खुशियों का ख़त लिख दे रब।
आश  लगाए  बैठा  हूं मन में,
तेरा संदेशा आएगा अब-तब।
सफ़र  लंबा  इस  जीवन  का,
दुर्घटनाओं से बचाना हर पल।
दुर्गम पहाड़ चट्टान को चीरता,
जैसे नदी  मदमस्त कल-कल।
स्नेह करूणा के  हर अक्षर हो,
तेरी कृपा ख़त का अभिलाषी।
बस कोरा कागज़ मेरा जीवन,
भर दे  कोई रंग  हो इंद्रधनुषी।
लक्ष्य मेरा सुख-चैन नहीं, पर,
वसुधैव कुटुंबकम् की भावना।
लिख  दे शौर्य ख़त जीवन मेरे,
कर सकूं मुश्किलों का सामना।
             #कृष्ण कुमार कश्यप
                  गरियाबंद(छत्तीसगढ़)
परिचय-
नाम –      कृष्ण कुमार कश्यप
पिता का नाम- श्री ज़ोहर राम कश्यप
जन्म स्थान – उरमाल
शिक्षा – बी.ए. डी.एड. 
व्यवसाय – शिक्षक (नौकरी)
भाषा ज्ञान – हिन्दी , छत्तीसगढ़ी
राज्य – छत्तीसगढ़
विधा – गीत, ग़ज़ल, कविता, लघुकथा, कहानी
प्राप्त सम्मान – रामेश्वर दूबे साहित्य सम्मान,
                     साहित्य सम्राट सम्मान,
                     साहित्य ग़ौरव सम्मान।
                     अज्ञेय लघुकथा कार सम्मान।
 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।