गीतिका….

3
Read Time1Second

sushila joshi
मौत के खौफ से भागती जिंदगी,
खौफ के खौफ से भागती जिंदगी।

करे क्यों यकीं कैसे धीरज धरे,
नेह के नाम से काटती जिंदगी।

कैसे कह दूँ कि वो सितमगर नहीं,
एक-एक कोर को ताकती जिंदगी।

अंधेरा इस तरह हर सूं छा गया,
रोशनी के लिए झांकती जिंदगी।

संग हवाएं थी दिल में तूफान था,
एक-एक पल को आंकती जिंदगी।

न चमन ही रहा,न चमनगर रहा,
याद के बोझ को जांचती जिंदगी।

अंधेरे हो, चाहे सन्नाटे हो,
चाह के साथ को चाहती जिंदगी।

बोझ थी बन रही दिल की धड़कनें,
एक-एक साँस को थमाती जिंदगी।।

                                                                                   #सुशीला जोशी

परिचय: नगरीय पब्लिक स्कूल में प्रशासनिक नौकरी करने वाली सुशीला जोशी का जन्म १९४१ में हुआ है। हिन्दी-अंग्रेजी में एमए के साथ ही आपने बीएड भी किया है। आप संगीत प्रभाकर (गायन, तबला, सहित सितार व कथक( प्रयाग संगीत समिति-इलाहाबाद) में भी निपुण हैं। लेखन में आप सभी विधाओं में बचपन से आज तक सक्रिय हैं। पांच पुस्तकों का प्रकाशन सहित अप्रकाशित साहित्य में १५ पांडुलिपियां तैयार हैं। अन्य पुरस्कारों के साथ आपको उत्तर प्रदेश हिन्दी साहित्य संस्थान द्वारा ‘अज्ञेय’ पुरस्कार दिया गया है। आकाशवाणी (दिल्ली)से ध्वन्यात्मक नाटकों में ध्वनि प्रसारण और १९६९ तथा २०१० में नाटक में अभिनय,सितार व कथक की मंच प्रस्तुति दी है। अंग्रेजी स्कूलों में शिक्षण और प्राचार्या भी रही हैं। आप मुज़फ्फरनगर में निवासी हैं|

0 0

matruadmin

3 thoughts on “गीतिका….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

मेरा देश मेरा भारत

Thu Apr 6 , 2017
रहमान  संग  में  यहाँ,ईसा,  नानक, राम। वीरों  की जननी यही,भारत इसका नाम।। विश्व पटल पर छाया न्यारा। प्यारा  भारत देश हमारा।। राणा, पन्ना,भामा,मीरा। यहीं हुए रसखान,कबीरा।। चरक,हलायुध,अब्दुल,भाभा। विश्व पटल की थे यह आभा।। जन्मे गीत, ग़ज़ल,कव्वाली। भारत की छवि लगती आली।। क्रिसमस, ईद,लोहड़ी,होली। पावनता पर्वों   ने  घोली।। अलग-थलग हैं भाषा […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।